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नीट यूजी 2026: परीक्षा रद्द होने के सदमे से उबरकर टॉपर बने फरीदाबाद के पंशुल बंसल

नीट यूजी 2026 के री-एग्जाम में ऑल इंडिया संयुक्त टॉपर बने फरीदाबाद के पंशुल बंसल की सफलता जितनी शानदार है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही भावुक है। पंशुल ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि पेपर लीक होने के कारण नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है, तो उन्हें गहरा सदमा लगा था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
नीट यूजी 2026: परीक्षा रद्द होने के सदमे से उबरकर टॉपर बने फरीदाबाद के पंशुल बंसल
मूल स्रोत

परीक्षा रद्द होने का सदमा और फिर शानदार वापसी

नीट यूजी 2026 की परीक्षा में फरीदाबाद के पंशुल बंसल ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर ऑल इंडिया संयुक्त टॉपर बनकर इतिहास रचा है। हालांकि, उनकी यह सफलता आसान नहीं थी। परीक्षा प्रक्रिया के दौरान जब पेपर लीक होने की वजह से नीट यूजी को रद्द किया गया, तो पंशुल के लिए यह एक बड़ा मानसिक झटका था। उन्होंने साझा किया कि उस समय उन्हें गहरा दुख हुआ था और वे काफी भावुक हो गए थे। दो साल की निरंतर मेहनत पर पानी फिरता देख उन्हें लगा था कि सब कुछ बिखर गया है।

मुश्किल घड़ी में उनके परिवार ने उन्हें संभाला और नई ऊर्जा के साथ फिर से तैयारी शुरू करने के लिए प्रेरित किया। पंशुल ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया और री-एग्जाम में 720 में से 715 अंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित की। हालांकि, बायोलॉजी में अंकों के अंतर के कारण उन्हें मेरिट सूची में दूसरा स्थान मिला, लेकिन उनकी उपलब्धि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है।

पढ़ाई का संतुलित तरीका और शौक

पंशुल बंसल की सफलता का एक बड़ा राज उनका संतुलित जीवन है। उन्होंने कभी भी 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करने का दबाव नहीं लिया। इसके बजाय, उन्होंने रोजाना 7 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई की। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। वे अपने खाली समय में पियानो बजाते थे और दोस्तों के साथ समय बिताते थे।

तैयारी के दौरान उन्होंने खुद को दुनिया से अलग नहीं किया। वे सोशल मीडिया का उपयोग करते थे और समय-समय पर दोस्तों के साथ बाहर भी जाते थे। पंशुल का कहना है कि लगातार पढ़ाई के बीच खुद को तरोताजा रखना उनकी एकाग्रता को और बढ़ाता था।

बचपन का सपना और परिवार का सहयोग

पंशुल ने पांचवीं कक्षा में ही डॉक्टर बनने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। उन्हें भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों में बचपन से ही गहरी रुचि थी। उनके पिता संजीव कुमार बंसल, जो एक व्यवसायी हैं, शुरू में चाहते थे कि उनका बेटा इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाए। लेकिन जब उन्होंने पंशुल के डॉक्टर बनने के जुनून को देखा, तो उन्होंने पूरी तरह से उनका समर्थन किया।

पंशुल ने अपनी 12वीं की पढ़ाई दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित समर फील्ड स्कूल से पूरी की। इस दौरान वे रोजाना फरीदाबाद से दिल्ली कोचिंग के लिए सफर करते थे। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और कभी भी कम अंक आने पर उन पर दबाव नहीं बनाया, बल्कि उनका हौसला बढ़ाया।

अभिभावकों के लिए एक संदेश

पंशुल के पिता संजीव कुमार बंसल ने अन्य अभिभावकों को सलाह दी है कि वे कभी भी अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। उन्होंने कहा कि हर बच्चे की अपनी अलग प्रतिभा होती है और माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उस प्रतिभा को पहचानें और उसे निखारने में मदद करें। उन्होंने जोर दिया कि अंक केवल एक संख्या हैं और वे बच्चे की पूरी क्षमता का पैमाना नहीं हो सकते।

पंशुल की यह यात्रा उन लाखों छात्रों के लिए एक उदाहरण है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि असफलता केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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