शहडोल: बेटे की शिक्षा के लिए मां का संघर्ष, 10 किलोमीटर पीठ पर उठाकर रोज स्कूल ले जाती हैं फूल कुमारी
शहडोल के झींक बिजुरी इलाके के दरशिला गांव का 12वीं कक्षा का छात्र राजकुमार जायसवाल शारीरिक परेशानी के कारण ठीक से चल नहीं पाता। स्कूल जाने के लिए उसकी मां फूल कुमारी रोज उसे पीठ पर बैठाकर करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करती हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

शिक्षा के लिए मां का अटूट संकल्प
शहडोल जिले के दरशिला गांव में एक मां का अपने दिव्यांग बेटे के प्रति समर्पण मिसाल बन गया है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले राजकुमार जायसवाल शारीरिक रूप से अक्षम हैं और अपने पैरों पर चलने में असमर्थ हैं। उनकी मां फूल कुमारी अपने बेटे के भविष्य को संवारने के लिए हर दिन कठिन संघर्ष कर रही हैं। वह अपने बेटे को रोज पीठ पर बैठाकर करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल पहुंचाती हैं।
राजकुमार झींक बिजुरी स्थित सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दरशिला से स्कूल की दूरी काफी अधिक है, जिसे तय करने के लिए फूल कुमारी पहले बेटे को पीठ पर लादकर बस स्टैंड तक ले जाती हैं। इसके बाद बस के जरिए वे झींक बिजुरी पहुंचती हैं। स्कूल पहुंचने के बाद भी उन्हें बेटे को सहारा देकर कक्षा तक ले जाना पड़ता है। इस दैनिक यात्रा में उन्हें बस का किराया भी खर्च करना पड़ता है।
मजदूरी छोड़कर बेटे को दिया पूरा समय
फूल कुमारी के लिए यह सफर आसान नहीं है। बेटे को स्कूल छोड़ने और छुट्टी होने तक वहीं रुकने के कारण उनका पूरा दिन स्कूल में ही बीत जाता है। इस जिम्मेदारी के चलते उन्हें अपनी मजदूरी का काम भी छोड़ना पड़ा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है। हालांकि, तमाम अभावों के बावजूद उन्होंने राजकुमार की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी है।
राजकुमार 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं और उनके पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी मौजूद है। मां-बेटे की इस स्थिति को देखकर स्थानीय पंचायत सचिव गंगा राम ने भी मदद का प्रयास किया था। उन्होंने बुढ़ार में अधिकारियों से संपर्क कर सहायता की मांग की थी, लेकिन उम्र 18 वर्ष से कम होने का हवाला देते हुए उन्हें स्कूटी देने से मना कर दिया गया।
इलेक्ट्रिक साइकिल की उम्मीद
राजकुमार का सपना है कि उन्हें एक इलेक्ट्रिक साइकिल मिल जाए, ताकि वह अपनी मां पर निर्भर रहने के बजाय खुद स्कूल आ-जा सकें। फूल कुमारी ने इस संबंध में मंत्री दिलीप जायसवाल को आवेदन देने के साथ ही कलेक्ट्रेट में भी दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें अब तक कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई है।
अब इस परिवार की निगाहें 11 सितंबर को झींक बिजुरी में आयोजित होने वाले 'जन विश्वास शिविर' पर टिकी हैं। जिला सामाजिक न्याय विभाग की अधिकारी प्रज्ञा मरावी ने आश्वासन दिया है कि यदि हितग्राही शिविर में आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहुंचते हैं, तो उनकी पात्रता की जांच कर नियमानुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जिले में चर्चा का विषय
फूल कुमारी का यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग उनकी हिम्मत की सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन से यह मांग भी उठ रही है कि इस होनहार छात्र की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए उसे तत्काल सहायता प्रदान की जानी चाहिए। राजकुमार की पढ़ाई के प्रति लगन और मां का त्याग समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

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मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!