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प्रयागराज: समाधान दिवस पर शिकायतों का अंबार, महज दो फीसदी मामलों का ही निपटारा

सरकारी तंत्र का पूरा अमला इन शिकायतों की भीड़ में से दो प्रतिशत को ही हल किया। लोगों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस आयोजित किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि हर बार शिकायतों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
प्रयागराज: समाधान दिवस पर शिकायतों का अंबार, महज दो फीसदी मामलों का ही निपटारा
मूल स्रोत

प्रयागराज में समाधान दिवस बना रस्म अदायगी, शिकायतों का लगा अंबार

प्रयागराज में आयोजित 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की विफलता का आईना बनकर सामने आया है। जिले की पांच प्रमुख तहसीलों—सदर, सोरांव, बारा, फूलपुर और कोरांव में एक ही दिन में कुल 2,084 शिकायतें दर्ज की गईं। भारी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद, इनमें से महज दो प्रतिशत शिकायतों का ही निस्तारण हो सका, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

महीने के पहले और तीसरे शनिवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना होता है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि शिकायतों का निपटारा होने के बजाय हर बार इनका आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते लोग अपनी समस्याओं को लेकर बार-बार तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,084 शिकायतों में से सबसे अधिक 1,163 मामले राजस्व विभाग से जुड़े हैं। जमीन के विवाद, पैमाइश और अवैध कब्जे से संबंधित इन शिकायतों की भरमार यह दर्शाती है कि राजस्व विभाग के अधिकारी जनहित के मामलों में कितनी रुचि ले रहे हैं। कोरांव तहसील की स्थिति सबसे चिंताजनक रही, जहां अकेले 642 शिकायतें दर्ज की गईं।

राजस्व के अलावा पुलिस विभाग से संबंधित 324 शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आई हैं। इसके साथ ही विकास कार्यों और बिजली विभाग से जुड़ी समस्याओं ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शिकायतों का यह पहाड़ प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और जवाबदेही के अभाव को स्पष्ट रूप से उजागर कर रहा है।

दिखावे की कार्रवाई और जनता की हताशा

प्रशासन ने कुछ तहसीलों में लेखपालों को प्रतिकूल प्रविष्टि देकर कार्रवाई का दिखावा जरूर किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या महज कागजी कार्रवाई से व्यवस्था में सुधार संभव है? जब पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद हो और निस्तारण दर दो प्रतिशत से भी कम रहे, तो यह स्पष्ट है कि समाधान के नाम पर केवल तारीखें दी जा रही हैं।

कोरांव में दर्ज 642 शिकायतों में पुलिस की 80, विकास विभाग की 65, बिजली की 11 और आपूर्ति विभाग की 15 शिकायतें शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि सरकारी तंत्र का एक बड़ा हिस्सा आम जनता की बुनियादी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। फाइलों में दबी ये शिकायतें प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा तमाचा हैं।

भविष्य की चुनौतियां और प्रशासनिक जवाबदेही

समाधान दिवस अब एक रस्म अदायगी बनकर रह गया है। यदि शिकायतों के निस्तारण की यही गति रही, तो जनता का सरकारी तंत्र से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। प्रशासन को अब केवल आंकड़ों की बाजीगरी से ऊपर उठकर धरातल पर काम करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक को न्याय मिल सके।

आने वाले समय में यदि शिकायतों के निपटारे के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई, तो यह प्रशासनिक अव्यवस्था और अधिक विकराल रूप ले सकती है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का वास्तविक समाधान चाहती है, जिसके लिए उच्च अधिकारियों को सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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