मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: 70 साल के सफर में छिपे हैं ये 8 अद्भुत और रहस्यमयी अजूबे
Madhya Pradesh celebrates its 70th Foundation Day. Explore 8 amazing facts about MP, from a 600-year-old chickpea tree and giant Noorjahan mango to Ajgar Dadar village, musical rocks and the Black Taj Mahal.

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश आज अपने स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। सात दशकों के इस गौरवशाली सफर में राज्य ने न केवल विकास की नई इबारतें लिखी हैं, बल्कि अपनी गोद में कई ऐसे प्राकृतिक और ऐतिहासिक रहस्य भी संजोए हैं जो दुनिया भर के पर्यटकों को हैरान करते हैं। आइए, स्थापना दिवस के इस अवसर पर प्रदेश के कुछ ऐसे ही अनूठे और रोमांचक पहलुओं पर एक नजर डालते हैं।
प्रकृति के अनोखे रंग: चने का पेड़ और नूरजहां आम
उज्जैन से करीब 70 किलोमीटर दूर भाटपचलाना गांव में एक ऐसा चने का पेड़ है, जिसे देखकर लोग दंग रह जाते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह पेड़ करीब 600 साल पुराना है। वहीं, अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा में पैदा होने वाला 'नूरजहां' आम अपनी विशालता के लिए मशहूर है। इस आम का वजन 5 किलो तक हो सकता है, जिसे देखकर इसे 'फैमिली पैक' आम भी कहा जाता है। कट्ठीवाड़ा की विशेष जलवायु ही इस फल को इतना खास बनाती है।
मंडला जिले का 'अजगर दादर' गांव सरीसृपों के प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पथरीली चट्टानों और गहरी दरारों वाली यह जगह अजगरों का पसंदीदा ठिकाना है। सर्दियों के दिनों में यहां चट्टानों पर धूप सेंकते अजगरों का नजारा किसी अजूबे से कम नहीं लगता। इसके अलावा, राजगढ़ जिले का झिरी गांव अपनी अनूठी संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की बातचीत में हिंदी या स्थानीय बोली के बजाय संस्कृत का उपयोग करते हैं।
नदियों का मायका और संगीत बिखेरते पत्थर
मध्य प्रदेश को 'नदियों का मायका' कहा जाता है क्योंकि नर्मदा, चंबल, शिप्रा और ताप्ती जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम यहीं से हुआ है। इनमें नर्मदा नदी का महत्व सबसे अधिक है, जो अन्य नदियों के विपरीत पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती है। वहीं, देवास की कावड़िया हिल्स में प्रकृति का एक और अद्भुत संगीत सुनाई देता है। यहां मौजूद लाखों खंभेनुमा पत्थरों को जब किसी धातु से टकराया जाता है, तो उनसे वाद्य यंत्रों जैसी मधुर ध्वनि निकलती है।
बुरहानपुर में स्थित शाह नवाज खां का मकबरा 'काला ताजमहल' के नाम से प्रसिद्ध है। उतावली नदी के तट पर स्थित यह संरचना आगरा के ताजमहल से भी पुरानी मानी जाती है। काले पत्थरों से निर्मित यह मकबरा अपनी वास्तुकला के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
ऐतिहासिक धरोहर: चौसठ योगिनी मंदिर
मुरैना के मितावली गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर अपनी अनूठी गोलाकार वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 64 कमरों वाले इस मंदिर के डिजाइन को लेकर यह चर्चा अक्सर होती है कि भारत की पुरानी संसद भवन की प्रेरणा इसी मंदिर से ली गई थी। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए, बल्कि अपनी स्थापत्य कला के लिए भी शोध का विषय बना हुआ है।
मध्य प्रदेश का यह 70 साल का सफर केवल प्रशासनिक सीमाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि यह उन परंपराओं, प्राकृतिक संपदाओं और ऐतिहासिक विरासतों का संगम है जो इसे भारत के अन्य राज्यों से अलग और विशिष्ट पहचान दिलाते हैं। स्थापना दिवस पर इन अजूबों को याद करना प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को नमन करने जैसा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!