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केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर महिलाओं का 'चिता सत्याग्रह', आठवें दिन भी जारी विरोध

MP Ken-Betwa Link Project protest eight days continues. केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का चिता आंदोलन शुक्रवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आमरण अनशन भी पांचवें दिन में पहुंच गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

10 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 711
केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर महिलाओं का 'चिता सत्याग्रह', आठवें दिन भी जारी विरोध
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मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। परियोजना से प्रभावित परिवारों का 'चिता आंदोलन' शुक्रवार को आठवें दिन भी जारी रहा, जबकि आमरण अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों का यह पांचवां दिन है। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

सांकेतिक फांसी और चिता पर लेटी महिलाएं

आंदोलन स्थल पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने विरोध के नए तरीके अपनाते हुए 'फांसी सत्याग्रह' शुरू किया है, जिसमें महिलाएं सांकेतिक फांसी लगाकर और चिता पर लेटकर अपना आक्रोश व्यक्त कर रही हैं। इसके अलावा, मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह के जरिए भी प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मझगांय, रूंझ और नेगुवा सहित कई गांवों के लोग इस परियोजना से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

आठ दिनों के लंबे अंतराल के बाद पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। हालांकि, अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है और अनशनकारियों के स्वास्थ्य की अनदेखी की जा रही है।

कानूनी दांव-पेच और मुआवजे का विवाद

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भू-अर्जन कानून 2013 की धारा 38(1) और 38(2) का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार, पूरा मुआवजा दिए बिना किसी भी स्थिति में जमीन या मकान का अधिग्रहण करना अवैध है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर कानून की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परियोजना के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, अनशन पर बैठे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद प्रशासन द्वारा मेडिकल परीक्षण न कराना उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।

आगे की राह और चेतावनी

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे इस प्रदर्शन को और अधिक व्यापक बनाएंगे। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। फिलहाल, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है।

यह परियोजना क्षेत्र के कई गांवों को विस्थापित करने की योजना रखती है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष है। मुआवजे की राशि और पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों और सरकारी तंत्र के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है, जो अब सड़क पर उतर आया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन आंदोलनकारियों की मांगों पर विचार करता है या फिर यह संघर्ष और अधिक उग्र रूप धारण करता है। फिलहाल, प्रभावित परिवार अपने हक के लिए डटे हुए हैं और प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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