राजस्थान में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: 10 हजार ट्रकों के पहिए थमे, VLTD और ई-डिटेक्शन नियमों पर मचा घमासान
Rajasthan truckers indefinite strike over VLTD, permits & e-detection chakka jam begins. Transport organisations demand system improvements. राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट और ई-डिटेक्शन चालान को लेकर ट्रांसपोर्टरों का आंदोलन सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान में परिवहन व्यवस्था से जुड़े नियमों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट संबंधी जटिलताओं और ई-डिटेक्शन चालान प्रणाली के खिलाफ राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है। सोमवार आधी रात से शुरू हुए इस चक्का जाम के कारण करीब 10 हजार ट्रकों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है।
व्यवस्था की कमी से जूझ रहे ट्रांसपोर्टर
ट्रांसपोर्ट संगठनों का स्पष्ट कहना है कि वे सरकार द्वारा लागू किए गए तकनीकी नियमों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए मौजूद बुनियादी ढांचे की कमी का विरोध कर रहे हैं। संघर्ष समिति के अनुसार, सरकार ने VLTD को अनिवार्य तो कर दिया है, लेकिन अधिकृत कंपनियों के पास इन उपकरणों की भारी कमी है। इस वजह से फिटनेस प्रमाण पत्र और परमिट नवीनीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अटक गए हैं, जिससे वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके अलावा, ई-डिटेक्शन के जरिए होने वाले चालानों को लेकर भी ट्रांसपोर्टरों में भारी आक्रोश है। उनका तर्क है कि जब तक सरकार हर जिले में सुलभ फिटनेस सेंटर और पर्याप्त तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं कराती, तब तक इन नियमों को सख्ती से लागू करना अव्यावहारिक है। ट्रांसपोर्टरों ने मांग की है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकलता, वे हड़ताल वापस नहीं लेंगे।
कई बड़े संगठनों का मिला समर्थन
इस आंदोलन को प्रदेश के प्रमुख परिवहन संगठनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है। लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन जैसे बड़े संगठनों ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। साथ ही, ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने भी ट्रांसपोर्टरों के इस संघर्ष को अपना समर्थन दिया है, जिससे आंदोलन का दायरा और बढ़ गया है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि परिवहन व्यवसाय पहले ही बढ़ते खर्चों और प्रशासनिक उदासीनता के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसे में अव्यावहारिक नियमों का दबाव कारोबार को पूरी तरह खत्म कर सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द वार्ता का रास्ता अपनाए ताकि परिवहन क्षेत्र को संकट से उबारा जा सके।
आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराया संकट
हड़ताल के कारण प्रदेश में माल ढुलाई पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो सीमेंट, स्टील, किराना और कृषि उपज जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आम जनता को भी महंगाई और वस्तुओं की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। ट्रांसपोर्टर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के परिवहन विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक समाधान पेश नहीं किया गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने के आसार हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
