बाबा रामदेव के खिलाफ मुजफ्फरपुर कोर्ट में परिवाद दर्ज, धार्मिक टिप्पणी पर मचा बवाल
Baba Ramdev religious sentiment controversy case hearing in Muzaffarpur court. योग गुरु बाबा रामदेव उर्फ रामकृष्ण यादव के खिलाफ मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय में एक परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तमन्ना हाशमी ने दायर किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की एक अदालत में कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई है। यह मामला उनके द्वारा दिए गए एक हालिया बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने धर्म और समुदाय को लेकर टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से समाज में धार्मिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है और लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है।
क्या है पूरा मामला और आरोप
मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय में यह परिवाद हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तमन्ना हाशमी द्वारा दायर किया गया है। शिकायत के अनुसार, 13 जुलाई 2026 की रात को टीवी पर बाबा रामदेव का एक बयान प्रसारित हुआ था। इस बयान में उन्होंने दावा किया था कि मुसलमानों का मूल भी हिंदुओं से ही जुड़ा है और सबका पूर्वज एक ही है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी से एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
परिवादी ने अपनी शिकायत में बाबा रामदेव (रामकृष्ण यादव) को मुख्य आरोपी बनाया है। उनका कहना है कि ऐसे बयानों से समाज में वैमनस्य फैल सकता है और धार्मिक उन्माद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 302 के तहत बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अदालत से अनुरोध किया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर संज्ञान लिया जाए और कानून के अनुसार उचित दंडात्मक प्रक्रिया शुरू की जाए। यह परिवाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 212 के अंतर्गत दर्ज किया गया है।
अदालत ने इस परिवाद को स्वीकार कर लिया है। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 21 जुलाई तय की गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है और बचाव पक्ष की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की राह
मुजफ्फरपुर की अदालत में दायर इस मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों की संवेदनशीलता को रेखांकित किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत अब परिवादी के साक्ष्यों और बयानों की समीक्षा करेगी, जिसके बाद ही मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। 21 जुलाई की सुनवाई के दौरान अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे की जांच या समन जारी करने की आवश्यकता है या नहीं।
फिलहाल, बाबा रामदेव या उनके संस्थान की ओर से इस विशिष्ट कानूनी नोटिस या परिवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस घटनाक्रम के बाद से क्षेत्र में कानूनी और सामाजिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासन और पुलिस भी इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
