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कटनी-जबलपुर के किसानों के लिए सौगात: 1432 करोड़ की बहोरीबंद सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी

बहुप्रतीक्षित बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। यह परियोजना महाकौशल अंचल में कृषि विकास को बढ़ावा देगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

13 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
कटनी-जबलपुर के किसानों के लिए सौगात: 1432 करोड़ की बहोरीबंद सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी
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महाकौशल क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को अब आधिकारिक तौर पर प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से कटनी और जबलपुर जिलों के 183 गांवों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

1432 करोड़ का निवेश और आधुनिक तकनीक

इस परियोजना पर कुल 1432.77 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जल संसाधन विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना में आधुनिक इंजीनियरिंग और जल प्रबंधन तकनीकों का समावेश किया गया है। परियोजना का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2029 तक इसे पूर्ण करना है। इसके लिए मुख्य जल स्रोत से 17.35 क्यूमेक पानी का उद्वहन किया जाएगा, जिसके लिए 25.15 मेगावाट क्षमता के सब-स्टेशन और पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली है। इसके जरिए पानी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे जल की बर्बादी को न्यूनतम किया जा सकेगा। कुल 46,716 हेक्टेयर कृषि भूमि को इस योजना से सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा।

दो जिलों के 183 गांवों को होगा सीधा लाभ

इस सिंचाई परियोजना का लाभ कटनी जिले की बहोरीबंद, स्लीमनाबाद, रीठी और कटनी तहसील के कुल 167 गांवों को मिलेगा। इसके अलावा, जबलपुर जिले की मझौली तहसील के 16 गांवों को भी इस योजना से जोड़ा गया है। इस प्रकार कुल 183 गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि अब मानसून की अनिश्चितता से मुक्त होकर साल भर सिंचित रह सकेगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र का क्रॉपिंग पैटर्न पूरी तरह बदल जाएगा। किसान अब केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय रबी और खरीफ दोनों मौसमों में दो से तीन फसलें ले सकेंगे। इससे न केवल उत्पादन दोगुना होगा, बल्कि नकदी फसलों और बागवानी को भी बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर

यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक लाइफलाइन साबित होगी। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूरों और तकनीकी विशेषज्ञों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। भविष्य में, कृषि उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और कृषि आधारित लघु उद्योगों के स्थापित होने की प्रबल संभावना है।

स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन उपलब्ध होने से शहरों की ओर होने वाले श्रम-पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने इस परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

प्रशासन इस परियोजना की निरंतर मॉनिटरिंग कर रहा है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2029 तक जब यह पानी खेतों तक पहुंचेगा, तो यह न केवल फसलों को हरा-भरा करेगा, बल्कि लाखों ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को प्रशासन द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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