भोपाल: दफ्तर टूटने के बाद सड़क पर आए भाजपा पार्षद, मंदिर के पास शुरू किया कामकाज
अपना ऑफिस टूटा तो सड़क पर बैठ गए पार्षद। सोमवार शाम को पार्षद ने सड़क पर मंदिर के पास ही कार्यालय शुरू कर दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सड़क पर शुरू हुआ वार्ड कार्यालय
भोपाल के वार्ड-62 में एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जहां भाजपा पार्षद राजेश चौकसे ने अपना दफ्तर टूटने के बाद खुले आसमान के नीचे काम करना शुरू कर दिया है। आनंद नगर चौराहे के पास स्थित एक मंदिर के समीप पार्षद ने सोमवार शाम से ही जनता की समस्याएं सुनना शुरू कर दिया। उनके इस कदम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
यह घटना तब चर्चा में आई जब 10 जुलाई को नगर निगम ने आनंद नगर में सरकारी दुकानों के ऊपर बन रहे पार्षद के निजी कार्यालय को जमींदोज कर दिया था। निगम की इस कार्रवाई के बाद से ही पार्षद ने अपना विरोध दर्ज कराया था। पार्षद का आरोप है कि यह निर्माण कार्य उन्होंने नगर निगम आयुक्त की मौखिक अनुमति के बाद ही शुरू किया था, फिर भी इसे अवैध बताकर गिरा दिया गया।
नगर निगम की कार्रवाई और दावे
नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार की गई है। निगम के अनुसार, लगभग 450 वर्गफुट क्षेत्र में किया गया यह निर्माण अवैध था और इससे करीब 30 लाख रुपये की सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निगम के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने बताया कि इस निर्माण के लिए कोई भी लिखित अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष को कार्रवाई से तीन दिन पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद राजस्व विभाग और पुलिस बल की मौजूदगी में यह ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
पार्षद के आरोप और राजनीतिक गलियारे
दूसरी ओर, पार्षद राजेश चौकसे का दावा है कि उन्होंने एक महीने पहले ही नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की जानकारी दी थी और मौखिक सहमति मिलने के बाद ही काम आगे बढ़ाया था। उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक साजिश का इशारा करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम राज्य मंत्री कृष्णा गौर के निर्देश पर उठाया गया है। पार्षद का तर्क है कि शहर में कई अन्य पार्षदों के कार्यालय भी सरकारी जमीन पर बने हुए हैं, लेकिन कार्रवाई केवल उनके खिलाफ ही की गई।
फिलहाल, पार्षद के सड़क पर दफ्तर खोलने से स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ निगम प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया बता रहा है, तो दूसरी तरफ पार्षद इसे अपने प्रति द्वेषपूर्ण कार्रवाई मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह से निकलता है और क्या पार्षद को अपना दफ्तर दोबारा बनाने के लिए कोई वैकल्पिक जगह मिलती है या नहीं।
जनता की समस्याओं का समाधान
दफ्तर टूटने के बावजूद पार्षद का कहना है कि वे जनता की सेवा से पीछे नहीं हटेंगे। सड़क पर बैठकर लोगों की शिकायतें सुनने के उनके निर्णय को स्थानीय निवासियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जहां कुछ लोग इसे विरोध का एक तरीका मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान का परिणाम बता रहे हैं। फिलहाल, वार्ड-62 के नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर इसी अस्थायी दफ्तर में पहुंचने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल इस मामले में कोई नया निर्देश जारी नहीं हुआ है। नगर निगम की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी, यदि कहीं कोई अवैध निर्माण पाया जाता है। इस मामले ने भोपाल नगर निगम और पार्षदों के बीच के समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!