सोनम वांगचुक के अनशन को केजरीवाल का समर्थन, धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर शिक्षा मंत्री बनाने की मांग
Kejriwal supports Sonam Wangchuk protest at Jantar Mantar, Delhi for education reforms. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर से शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग रख कर युवाओं के अंदर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। गुरुवार को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके संघर्ष का समर्थन किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के आंदोलन को मिला केजरीवाल का साथ
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनशन को अपना समर्थन दिया है। सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। केजरीवाल ने इस दौरान केंद्र सरकार पर तीखे हमले करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने का सुझाव दिया।
केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे क्रांतिकारी व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे क्योंकि उन्हें डर है कि वांगचुक शिक्षा प्रणाली में बड़े और प्रभावी बदलाव ला सकते हैं। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी मौजूद रहे।
पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर चिंता
अरविंद केजरीवाल ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र परीक्षा देने जाता है, तो वह अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता पर भरोसा रखता है, लेकिन मौजूदा सिस्टम ने युवाओं का यह आत्मविश्वास तोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक अब एक संगठित तंत्र बन गया है, जहां जांच और गिरफ्तारियों के बाद भी दोषियों को जमानत मिल जाती है और अगले साल फिर वही स्थिति दोहराई जाती है।
उन्होंने नीट पेपर लीक के बाद छात्रों द्वारा की गई आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए। केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे रखी है, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश है।
सरकार को दी 2011 के आंदोलन की याद
केजरीवाल ने जंतर-मंतर के इतिहास को याद करते हुए चेतावनी दी कि अहंकार में डूबी सरकारें अंततः सत्ता से बाहर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन के समय भी तत्कालीन सरकार को अपने अहंकार पर गर्व था, लेकिन जनता ने उसे सबक सिखाया। उन्होंने वर्तमान सरकार को सलाह दी कि वे युवाओं के 'कॉकरोच आंदोलन' और सोनम वांगचुक की मांगों को गंभीरता से लें।
संजय सिंह ने भी इस आंदोलन को पूरी तरह समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में वे स्वयं एक कार्यकर्ता के रूप में शामिल होंगे। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों से भी इस लड़ाई में साथ आने की अपील की, क्योंकि यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत
अंत में केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि देश की जर्जर हो चुकी शिक्षा प्रणाली को ठीक करने के लिए केवल मामूली सुधार काफी नहीं हैं। इसके लिए क्रांतिकारी कदमों की आवश्यकता है, जो केवल सोनम वांगचुक जैसे शिक्षाविद् के नेतृत्व में ही संभव हो सकते हैं। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होने वाले शांतिपूर्ण संसद मार्च को सफल बनाने के लिए देशवासियों से भारी संख्या में जुटने का आह्वान किया।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
