E-20 पेट्रोल से खराब हो रही गाड़ियां, केजरीवाल ने कार मालिकों और मैकेनिकों से की सीधी बात
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल E-20 पेट्रोल (एथेनॉल-मिश्रित ईंधन) को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे है। इस लेकर उन्होंने दिल्ली में कुछ कार मालिकों और मैकेनिकों से मुलाकात कर E-20 के प्रभाव पर चर्चा की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

E-20 ईंधन के प्रभाव पर अरविंद केजरीवाल का केंद्र पर बड़ा हमला
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में दिल्ली में कार मालिकों और ऑटोमोबाइल मैकेनिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र E-20 पेट्रोल, यानी एथेनॉल-मिश्रित ईंधन का वाहनों पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव था। केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, केजरीवाल ने उन लोगों से मुलाकात की जो सीधे तौर पर इस ईंधन के उपयोग से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा थोपे गए इस ईंधन के कारण आम जनता की गाड़ियां खराब हो रही हैं और उनके माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
मैकेनिकों और वाहन मालिकों की बढ़ती चिंताएं
मुलाकात के दौरान मैकेनिकों ने बताया कि उनके वर्कशॉप में ऐसी गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं जो E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद तकनीकी खराबी का शिकार हुई हैं। कई वाहन मालिकों ने शिकायत की कि उनकी गाड़ियां चलते-चलते अचानक बंद हो जाती हैं, जिसके कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने तो यह भी बताया कि वे अपनी खराब हुई गाड़ी को धक्का मारकर वर्कशॉप तक लाने को मजबूर हुए।
एक कार मालिक ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी 2022-23 मॉडल की होंडा सिटी कार, जो पहले लगभग 22 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, अब E-20 ईंधन के उपयोग के बाद घटकर मात्र 13 किलोमीटर प्रति लीटर पर आ गई है। इस तरह की गिरावट से आम मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि टीवी पर झूठे इंटरव्यू देने या फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता इस समय भारी संकट से गुजर रही है और सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि लोगों पर E-20 ईंधन को जबरन थोपना तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
केजरीवाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब यह समस्या मध्यम वर्ग की सहनशक्ति से बाहर हो रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे केवल तकनीकी दावों के बजाय उन लोगों की समस्याओं को सुनें जो रोजाना इन वाहनों का उपयोग कर रहे हैं और ईंधन की गुणवत्ता के कारण आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं।
ईंधन नीति पर बढ़ता राजनीतिक दबाव
यह पहली बार नहीं है जब E-20 पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एथेनॉल मिश्रण को लेकर ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और आम उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से बहस चल रही है। जहां सरकार इसे पर्यावरण के अनुकूल और आयात कम करने वाला कदम बताती है, वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों का तर्क है कि पुरानी और नई तकनीक वाली गाड़ियों के इंजन इस मिश्रण के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दिल्ली जैसे महानगरों में वाहनों की बड़ी संख्या है और ईंधन की कीमतों के साथ-साथ माइलेज में कमी एक बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल, केजरीवाल का यह कदम केंद्र सरकार के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
