हरियाणा कांग्रेस में कलह: प्रभारी की पहली बैठक में ही विधायकों ने फाड़ी नेम स्लिप, मंच व्यवस्था पर उठे सवाल
Chandigarh Congress Meeting Controversy Update. जिन लोगों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उनको ही मंच पर बैठाया जा रहा है। क्या पार्टी को हाशिए पर लाना चाहते हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

चंडीगढ़ में कांग्रेस की बैठक में हंगामा
हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी संजय दत्त की पहली ही बैठक में पार्टी के भीतर का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित इस बैठक के दौरान मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया समेत अन्य नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। स्थिति तब बिगड़ गई जब सेतिया और उनके साथी विधायकों ने मंच पर लगी अपने नाम की पर्चियां फाड़ दीं और विरोध स्वरूप आगे जाकर बैठ गए।
विधायक गोकुल सेतिया ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन लोगों ने अतीत में पार्टी को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें ही मंच पर प्रमुखता दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के प्रति समर्पित नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा है, जो संगठन के भविष्य के लिए चिंताजनक है। सेतिया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनके साथियों ने यह कदम पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी और अनुशासनहीनता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए उठाया है।
पार्टी अनुशासन और नेतृत्व पर सवाल
सेतिया ने पार्टी नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा कि जब 32 विधायकों को संभालना मुश्किल हो रहा है, तो संगठन को कैसे मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बिना नाम लिए पूर्व सांसद अशोक तंवर और अन्य नेताओं पर निशाना साधा, जो हाल ही में कांग्रेस में वापस लौटे हैं। सेतिया का तर्क है कि जो लोग पहले अन्य दलों में रहे और कांग्रेस के खिलाफ सक्रिय थे, उन्हें मंच पर आगे बैठाना पुराने कार्यकर्ताओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को माइक थमाना और प्रवचन दिलवाना पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करता है।
इस विवाद के बीच बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच एक हल्की-फुल्की बातचीत भी चर्चा का विषय रही। हुड्डा ने सुरजेवाला से साथ देने की बात कही, जिस पर सुरजेवाला ने चुटकी लेते हुए कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से उनका साथ दे रहे हैं। हालांकि, मंच पर बैठने के प्रोटोकॉल को लेकर हुआ विवाद पार्टी की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करने के लिए पर्याप्त था।
प्रदेश अध्यक्ष ने दी सफाई
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच पर बैठने की व्यवस्था में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ लोगों का नंबर पीछे आना स्वाभाविक है। राव नरेंद्र सिंह ने गोकुल सेतिया को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि वे युवा हैं और उनमें जोश है, लेकिन उन्हें अपनी बात सीधे नेतृत्व से करनी चाहिए थी।
अशोक तंवर को मंच पर स्थान देने के सवाल पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला पार्टी हाईकमान का है। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता पार्टी में वापस आता है, तो उसका सम्मान करना प्रोटोकॉल का हिस्सा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस में सभी को उचित सम्मान मिलता है और वे खुद इस बात को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सेतिया के साथ बातचीत करके इस गलतफहमी को दूर कर लिया जाएगा।
आगे की राह और चुनौतियां
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस हरियाणा में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के भीतर विधायकों का यह असंतोष आने वाले समय में नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। गोकुल सेतिया ने साफ कर दिया है कि वे पार्टी के प्रति वफादार हैं, लेकिन गलत नीतियों और व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे। अब देखना यह होगा कि पार्टी हाईकमान इस आंतरिक कलह को कैसे शांत करता है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को एक साथ लाकर आगामी चुनावों के लिए एकजुट करना है। यदि असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है। फिलहाल, पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
