ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

गोपालगंज: प्रशासनिक सुस्ती से कबाड़ बनीं दिव्यांगों की ट्राईसाइकिलें, दो साल से खुले आसमान के नीचे सड़ रही सरकारी संपत्ति

केंद्र सरकार की एडिप योजना के तहत दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आवागमन को सुगम करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में लाखों रुपये की लागत से 23 नई ट्राईसाइकिलें खरीदी गई थीं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

12 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
गोपालगंज: प्रशासनिक सुस्ती से कबाड़ बनीं दिव्यांगों की ट्राईसाइकिलें, दो साल से खुले आसमान के नीचे सड़ रही सरकारी संपत्ति
मूल स्रोत

बिहार के गोपालगंज जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में दिव्यांगजनों के लिए खरीदी गई ट्राईसाइकिलें पिछले दो वर्षों से खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई हैं। देखरेख के अभाव में ये साइकिलें अब जंग का शिकार होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। इन उपकरणों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय सरकारी उदासीनता ने इन्हें बेकार कर दिया है।

एडिप योजना के तहत खरीदी गई थीं ट्राईसाइकिलें

केंद्र सरकार की एडिप (ADIP) योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके आवागमन को सुगम बनाना है। इसी योजना के तहत वर्ष 2022 में लाखों रुपये खर्च कर 23 नई ट्राईसाइकिलें खरीदी गई थीं। इन उपकरणों का लक्ष्य उन दिव्यांगों की मदद करना था जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं। हालांकि, खरीद के दो साल बीत जाने के बाद भी ये साइकिलें लाभार्थियों तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे योजना का मूल उद्देश्य ही विफल हो गया है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, जब इन ट्राईसाइकिलों का वितरण शुरू किया गया था, तब कुछ लाभार्थी किन्हीं कारणों से कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए थे। इसके बाद प्रशासन ने इन उपकरणों को ब्लॉक परिसर में ही छोड़ दिया। समय के साथ इन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली, जिसके कारण अब ये घास-फूस और धूल के बीच सड़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

हाल ही में इन ट्राईसाइकिलों की दयनीय स्थिति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सरकारी धन से खरीदी गई ये कीमती सामग्रियां कबाड़ में बदल चुकी हैं। इस फुटेज के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन साइकिलों को जरूरतमंदों को दे दिया जाता, तो आज कई दिव्यांग स्वावलंबन के साथ अपना जीवन यापन कर रहे होते।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का भी एक बड़ा उदाहरण है। लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को इस तरह लावारिस छोड़ देना विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

सांसद ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि गोपालगंज और फुलवरिया प्रखंड में वितरण से बची ट्राईसाइकिलें वर्षों से खराब हो रही हैं। उन्होंने इसे भारत सरकार के धन की बर्बादी करार दिया है।

सांसद ने जिला पदाधिकारी को इस पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगों के अधिकारों के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भविष्य की राह और जवाबदेही

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या बची हुई साइकिलों को मरम्मत के बाद किसी तरह उपयोग में लाया जा सकता है। इस घटना ने सरकारी योजनाओं के वितरण तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वितरण प्रक्रिया की सख्त निगरानी अनिवार्य हो गई है।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें