चूरू में कचरा प्रबंधन की नई पहल: अब रोजाना 70 टन कचरे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

शहर को कचरे के ढेरों से मिलेगी स्थाई मुक्ति
राजस्थान के चूरू शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नगर परिषद ने शहर में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने और कचरे के निस्तारण के लिए दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल भविष्य में कचरे के नए पहाड़ बनने से रोकना है, बल्कि वर्षों से गाजसर की रोही में जमा कचरे के पुराने ढेर को भी पूरी तरह हटाना है।
नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, शहर से प्रतिदिन लगभग 70 टन मिश्रित कचरा निकलता है। अब इस कचरे को कहीं और डंप करने के बजाय सीधे हाडा फैक्ट्री के पास स्थित नए प्लांट में भेजा जाएगा। इस प्लांट के संचालन के लिए एक निजी कंपनी को तीन साल के लिए 4.52 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शहर का दैनिक कचरा उसी दिन वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर दिया जाए।
बायोमाइनिंग तकनीक से होगा पुराने कचरे का निपटारा
गाजसर की रोही में जमा करीब 12 हजार घन मीटर पुराने कचरे को हटाने के लिए राज्य सरकार की 310 करोड़ रुपये की 'लीगेसी वेस्ट हटाओ परियोजना' के तहत चूरू को शामिल किया गया है। इस परियोजना के पहले चरण में 1250 घन मीटर कचरे के निस्तारण के लिए स्वीकृति पत्र (एलओए) जारी किया जा चुका है। यह कार्य बायोमाइनिंग तकनीक के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
बायोमाइनिंग प्रक्रिया के तहत कचरे को छानकर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। इसमें निकलने वाली मिट्टी और अनुपयोगी कंक्रीट का उपयोग सड़क निर्माण कार्य में किया जाएगा। प्लास्टिक और धातु जैसी वस्तुओं को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा, जबकि ज्वलनशील कचरे से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों और ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा।
दैनिक कचरे के लिए नई व्यवस्था
नगर परिषद के एईएन इरफान अली ने बताया कि नए प्लांट के संचालन का वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद अब कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। अब तक कचरे के जो ढेर शहर के बाहरी इलाकों में बन जाते थे, उन पर रोक लगेगी। रोजाना निकलने वाला 70 टन कचरा सीधे प्लांट पर पहुंचेगा, जहां उसका तुरंत निस्तारण किया जाएगा। इससे शहरवासियों को कचरे से होने वाली दुर्गंध और गंदगी की समस्या से स्थाई राहत मिलने की उम्मीद है।
नगर परिषद आयुक्त अभिलाषा सिंह ने कहा कि यह परियोजना शहर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। पुराने कचरे के ढेर को हटाने के साथ-साथ दैनिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में मदद करेगा। प्रशासन का प्रयास है कि इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से लागू कर शहर में स्वच्छता का एक नया मानक स्थापित किया जाए।
आने वाले समय में इस व्यवस्था के सुचारू रूप से चलने पर शहर में कचरा प्रबंधन की स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई देगा। नगर परिषद इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी करेगी ताकि कचरा निस्तारण के मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके और शहर को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
