राजस्थान में स्वास्थ्य योजना में धांधली: जयपुर के प्रमुख अस्पतालों पर गिरी गाज, 24 पर भारी जुर्माना
RGHS Rajasthan hospital penalty list updates, Jaipur private hospital suspension action. राज्य सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ा मैसेज देने की कोशिश की गई है। सरकार ने पिछले तीन महीनों में 51 संबद्ध अस्पतालों को योजना से निलंबित किया है, जबकि हाल ही में एक महीने के भीतर 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान सरकार ने राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए अनियमितताओं में लिप्त अस्पतालों पर शिकंजा कस दिया है। पिछले तीन महीनों के भीतर राज्य के 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, हालिया ऑडिट रिपोर्ट के बाद 24 अस्पतालों पर करीब तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिससे निजी चिकित्सा संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
जयपुर के बड़े अस्पताल कार्रवाई की जद में
इस कार्रवाई के दायरे में जयपुर के कई प्रतिष्ठित निजी अस्पताल भी आए हैं। इनमें मणिपाल हॉस्पिटल, सोनी हॉस्पिटल और इंडस हॉस्पिटल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सख्ती दिखाई है। इनमें उदयपुर का पारस जेके हॉस्पिटल, डूंगरपुर का जील हॉस्पिटल और अजमेर का मार्बल सिटी हॉस्पिटल प्रमुख हैं। इन सभी संस्थानों पर वित्तीय गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन के आरोप सिद्ध हुए हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्पष्ट किया है कि सरकार आरजीएचएस के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने का पैसा केवल जरूरतमंद मरीजों के वास्तविक इलाज के लिए है, न कि किसी अस्पताल की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए। किसी भी स्तर पर फर्जी क्लेम या धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऑडिट में सामने आई गंभीर खामियां
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि ऑडिट के दौरान अस्पतालों की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं। जांच में सामने आया कि कई अस्पताल फर्जी या डुप्लीकेट दस्तावेजों के आधार पर भुगतान का दावा कर रहे थे। इसके अलावा, मरीजों को अनावश्यक जांचों के लिए मजबूर करना, एक ही सेवा को अलग-अलग पैकेज में दिखाकर अतिरिक्त राशि वसूलना और बिना उचित दस्तावेजों के क्लेम प्रस्तुत करना जैसी अनियमितताएं आम हो गई थीं।
एक और चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कई अस्पतालों में ओपीडी (OPD) के मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी (IPD) में भर्ती दिखाकर सरकारी योजना से भुगतान प्राप्त किया जा रहा था। इन सभी मामलों की विस्तृत सुनवाई राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निधि पटेल द्वारा की गई, जिसके बाद साक्ष्यों के आधार पर निलंबन और जुर्माने के आदेश पारित किए गए।
भविष्य में भी जारी रहेगी निगरानी
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य राजकोष के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए ऑडिट सिस्टम को और अधिक तकनीकी और मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी यदि किसी अस्पताल में फर्जी बिलिंग, प्रक्रियागत उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि आरजीएचएस के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को अब नियमों का पालन पूरी पारदर्शिता के साथ करना होगा। स्वास्थ्य विभाग अब इन अस्पतालों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है ताकि आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई बाधा न आए और सरकारी धन का दुरुपयोग पूरी तरह से रोका जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
