भोपाल ग्लोबल स्किल पार्क: 1548 करोड़ का निवेश, लक्ष्य से काफी पीछे युवाओं का प्रशिक्षण

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

भोपाल में स्थित संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क (SSRGSP) अपनी स्थापना के मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने में संघर्ष करता नजर आ रहा है। लगभग 30 एकड़ में फैले इस संस्थान को 1548 करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार के योग्य बनाना था। हालांकि, दो साल बीत जाने के बाद भी संस्थान का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है।
लक्ष्य और वास्तविकता में बड़ा अंतर
संस्थान की शुरुआत 2024 में हुई थी, जिसमें सिंगापुर के आईटीईईएस (ITEES) के सहयोग से फैकल्टी को प्रशिक्षित किया गया था। शुरुआत में यह दावा किया गया था कि हर साल 6,000 से अधिक युवाओं को यहां प्रशिक्षित किया जाएगा और धीरे-धीरे यह संख्या 10,000 तक पहुंचाई जाएगी। लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक केवल 2,903 छात्र ही यहां से ट्रेनिंग पूरी कर पाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में इस संस्थान के प्रति जागरूकता की भारी कमी देखी जा रही है।
वर्तमान में यहां एडवांस्ड सीएनसी, मेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी, ऑटोमेटिव टेक्नोलॉजी और आईसीटी जैसे आधुनिक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि लैब में उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन थ्रीडी प्रिंटर जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग उस स्तर पर नहीं हो पा रहा है जिसकी आवश्यकता है। साथ ही, अधिकांश फैकल्टी कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित है, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
अधूरे वादे और प्लेसमेंट पर चुप्पी
संस्थान ने 1,163 छात्रों के प्लेसमेंट का दावा तो किया है, लेकिन इन छात्रों को किस पैकेज पर नौकरी मिली, इस पर संस्थान ने चुप्पी साध रखी है। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर शुरू किए जाने वाले 35 शॉर्ट-टर्म कोर्स, जिनमें एआई बिल्डर, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और गेमिंग जैसे आधुनिक विषय शामिल थे, वे भी वर्ष 2025 की समय सीमा बीतने के बाद भी शुरू नहीं हो सके हैं।
निर्माण कार्यों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। मार्च 2026 तक पूरा होने वाले निर्माण कार्य अभी भी जारी हैं। संस्थान के एक्सटर्नल डायरेक्टर नीरज सहाय का तर्क है कि शुरुआत में जानकारी के अभाव के कारण छात्र कम थे, लेकिन अब स्थिति बेहतर हो रही है और प्लेसमेंट के आंकड़े भी संतोषजनक हैं।
छोटे शहरों और अन्य केंद्रों की स्थिति
केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्किल इंडिया सेंटरों की स्थिति चिंताजनक है। गुना में संचालित केंद्र को पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिला है। वहां के प्रभारी के पास यह डेटा ही उपलब्ध नहीं है कि कितने युवाओं को रोजगार मिला है। स्किल इंडिया पोर्टल के अनुसार, वहां नामांकन तो हुए, लेकिन प्रमाणन की संख्या काफी कम रही।
शिवपुरी के सरकारी कॉलेजों और आईटीआई में भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अनियमितताएं सामने आई हैं। 817 छात्रों के पंजीकरण के बावजूद कक्षाओं में उपस्थिति न के बराबर रही। कहीं-कहीं उपस्थिति 5 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई, जिसे अधिकारियों ने जनगणना ड्यूटी का हवाला देकर स्पष्ट करने का प्रयास किया है। कुल मिलाकर, राज्य में कौशल विकास के नाम पर किए जा रहे ये बड़े दावे धरातल पर अभी भी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
