बांदा दोहरे हत्याकांड: एसआईटी की पूछताछ में तीन नए चेहरों का खुलासा, आरोपितों ने किया सीबीआई जांच का दावा
बांदा के नंदवारा गांव में दो मासूम बच्चों की हत्या के मामले में पुलिस ने गुरुवार को जेल से कस्टडी रिमांड पर लाए गए 4 आरोपितों से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में तीन अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

छह घंटे चली मैराथन पूछताछ
बांदा के नंदवारा गांव में हुए दो मासूम बच्चों के चर्चित दोहरे हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुरुवार को एसआईटी ने जेल से कस्टडी रिमांड पर लाए गए चार मुख्य आरोपितों से नरैनी कोतवाली में करीब छह घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान जांच टीम ने घटनाक्रम से जुड़े 11 महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जिनके जवाबों के आधार पर अब जांच की दिशा आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस लंबी पूछताछ के दौरान तीन ऐसे नए नामों का खुलासा हुआ है, जो अब तक की जांच में सामने नहीं आए थे। पुलिस अब इन तीनों व्यक्तियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्याकांड में उनकी संलिप्तता किस हद तक है।
आरोपितों ने किया राजनीतिक साजिश का दावा
पूछताछ के दौरान आरोपितों ने अपना बचाव करते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। उन्होंने पुलिस के सामने दावा किया कि उन्हें एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया है। इतना ही नहीं, आरोपितों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई से जांच कराने की मांग भी दोहराई है। हालांकि, पुलिस के अनुसार आरोपितों ने वही बातें दोहराई हैं जो उन्होंने गिरफ्तारी के समय कही थीं।
जांच टीम ने आरोपितों से बच्चों के बगीचे में मिलने, उन्हें पकड़ने और सिर भिड़ाकर हत्या करने जैसे गंभीर पहलुओं पर सवाल किए। हालांकि, सुरक्षा और जांच की रणनीति को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों को घटनास्थल पर नहीं ले जाने का निर्णय लिया और न ही फिलहाल सीन रिक्रिएशन कराया गया।
मामले की पृष्ठभूमि और अब तक की कार्रवाई
यह दुखद घटना 30 सितंबर की है, जब नंदवारा गांव में भइयाराम के दो छोटे बेटे मनोज (6) और युवराज (4) के शव पानी से भरे एक गड्ढे में बरामद हुए थे। इस मामले में कुल 9 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें से पुलिस अब तक 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सात सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है।
गुरुवार को जिन चार आरोपितों को रिमांड पर लिया गया था, उनमें भवानीदीन, अखिलेश, सुरेंद्र नेता और रामप्रसाद लंबरी शामिल हैं। ये सभी 2 अक्टूबर से मंडल कारागार में बंद थे। अदालत ने पुलिस को 27 अक्टूबर को छह घंटे की कस्टडी रिमांड की अनुमति दी थी, जिसके बाद पूछताछ पूरी कर उन्हें वापस जेल भेज दिया गया है।
आगे की रणनीति
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने स्पष्ट किया है कि जांच टीम अब आरोपितों द्वारा दिए गए बयानों का मिलान अब तक जुटाए गए साक्ष्यों से कर रही है। जल्द ही इस मामले में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। सीओ प्रवीण कुमार ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में आवश्यकता महसूस हुई, तो आरोपितों को दोबारा रिमांड पर लिया जा सकता है।
अगली रिमांड प्रक्रिया में पुलिस महेंद्र पाल वर्मा और हिस्ट्रीशीटर शेरा से भी पूछताछ कर सकती है। पुलिस का मुख्य ध्यान अब उन तीन नए नामों की पुष्टि करने पर है जो पूछताछ के दौरान सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए हर संभव साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!