बालाघाट पावर हाउस अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, 65 परिवारों को खाली करनी होगी सरकारी जमीन
जबलपुर उच्च न्यायालय ने बालाघाट शहर के पावर हाउस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के मामले में प्रभावितों की याचिका खारिज कर दी है। शुक्रवार को आए इस फैसले से अतिक्रमणकारियों को बड़ा झटका लगा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हाईकोर्ट से अतिक्रमणकारियों को बड़ा झटका
बालाघाट शहर के पावर हाउस क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठे लोगों को जबलपुर उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब लगभग 65 परिवारों को वहां से हटना होगा। प्रशासन इस जमीन पर तहसील भवन का निर्माण करने की योजना बना रहा है, जिसके लिए लंबे समय से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही थी।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता 13 जुलाई को बालाघाट तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रभावितों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करे। साथ ही, कोर्ट ने तहसीलदार को यह भी निर्देशित किया है कि वे एक महीने के भीतर इन परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने या शिफ्ट करने के संबंध में अंतिम निर्णय लें।
विवाद और कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि
पावर हाउस क्षेत्र की इस सरकारी भूमि पर कई वर्षों से 60 से 65 लोगों ने अस्थायी मकान बनाकर कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने जब बेदखली की प्रक्रिया शुरू की और नोटिस जारी किए, तो स्थानीय स्तर पर भारी विरोध देखने को मिला था। इस दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप भी हुआ और विरोध प्रदर्शन के चलते कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। जब प्रशासनिक दबाव बढ़ा, तो प्रभावित लोगों ने राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी इन कब्जाधारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में शिफ्ट होने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उस समय उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अब न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि याचिकाकर्ता तहसीलदार द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक आवास में जाने से इनकार करते हैं, तो प्रशासन कानून के दायरे में रहकर अतिक्रमण हटाने के लिए स्वतंत्र होगा।
तहसील भवन निर्माण का रास्ता साफ
पावर हाउस की जमीन पर तहसील भवन का निर्माण बालाघाट प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद ही इस निर्माण कार्य को शुरू किया जा सकेगा। कोर्ट के इस ताजा फैसले ने प्रशासन के लिए कानूनी बाधाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। अब पूरी प्रक्रिया तहसीलदार के स्तर पर होने वाली सुनवाई और वैकल्पिक आवास के आवंटन पर निर्भर करेगी।
आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। 13 जुलाई की सुनवाई के बाद यह तय हो जाएगा कि विस्थापन की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाएगी। यदि प्रभावित लोग प्रशासन के साथ सहयोग नहीं करते हैं, तो तहसीलदार को सख्त कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है, जिससे सरकारी जमीन को पूरी तरह से खाली कराया जा सके।
कानूनी स्थिति और भविष्य की कार्रवाई
न्यायालय का यह रुख स्पष्ट करता है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ताओं को अब कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखना होगा। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर वहां जनहित के कार्यों को गति देना है। अब देखना यह होगा कि क्या 65 परिवार इस बार प्रशासन के वैकल्पिक आवास के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या मामला और अधिक खिंचता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!