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E20 पेट्रोल का असर: अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों से मांगी लिखित गारंटी, पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

Arvind Kejriwal demands E20 ethanol petrol clarification, consumer guarantee from auto companies. India. आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश के करोड़ों वाहन मालिकों के हितों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। केजरीवाल ने देश की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के इस्तेमाल और पुरानी गाड़ियों (2023 से पहले बनी) पर इसके प्रभाव को लेकर लिखित स्पष्टीकरण और उपभोक्ता गारंटी की मांग की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 807
E20 पेट्रोल का असर: अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों से मांगी लिखित गारंटी, पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
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वाहन मालिकों के हितों की सुरक्षा के लिए केजरीवाल का बड़ा कदम

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश के करोड़ों वाहन मालिकों की चिंताओं को केंद्र में रखते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने देश की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यह मुद्दा विशेष रूप से उन पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए अहम है, जो 2023 से पहले निर्मित की गई थीं।

केजरीवाल ने कंपनियों से लिखित स्पष्टीकरण और उपभोक्ता गारंटी की मांग की है। उनका तर्क है कि सरकार और कंपनियों के दावों और वाहनों के आधिकारिक 'ओनर्स मैनुअल' के बीच विरोधाभास है, जिससे आम जनता भ्रमित है। उन्होंने इस मामले में दो अलग-अलग श्रेणियों में पत्र भेजे हैं, ताकि कंपनियों की जवाबदेही तय की जा सके।

दावों और मैनुअल के बीच का विरोधाभास

केजरीवाल ने मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हीरो मोटोकॉर्प जैसी बड़ी कंपनियों को भेजे गए पत्र में 4 जुलाई 2026 को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया था कि 2023 से पहले के वाहनों में E20 ईंधन का उपयोग सुरक्षित है और इससे इंजन को नुकसान नहीं होगा, केवल माइलेज में मामूली कमी आएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कंपनियों के अपने ही 'ओनर्स मैनुअल' के विपरीत है। मैनुअल में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इन गाड़ियों में केवल 10 प्रतिशत एथेनॉल (E10) वाले पेट्रोल का ही उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि करोड़ों उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा हक है कि वे कंपनी के आधिकारिक मैनुअल पर भरोसा करें या वर्तमान में दिए जा रहे बयानों पर।

कंपनियों के सामने रखी गई दो प्रमुख शर्तें

टाटा मोटर्स सहित कुल 26 अन्य कंपनियों को भेजे गए दूसरे पत्र में केजरीवाल ने एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक और लिखित बयान जारी करने की मांग की है। उन्होंने कंपनियों के सामने दो कड़े सवाल रखे हैं, जिनका जवाब देना अब अनिवार्य माना जा रहा है।

पहला सवाल माइलेज में होने वाली गिरावट को लेकर है। केजरीवाल ने पूछा है कि यदि 2023 से पहले का कोई वाहन E20 ईंधन के उपयोग के कारण 10 प्रतिशत से अधिक माइलेज की कमी दर्ज करता है, तो क्या कंपनी प्रभावित मालिक को इसका मुआवजा देगी? दूसरा सवाल इंजन की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने पूछा है कि यदि E20 पेट्रोल के कारण इंजन या उसके किसी भी हिस्से को नुकसान पहुंचता है, तो क्या कंपनियां मरम्मत और पार्ट्स बदलने का पूरा खर्च उठाएंगी?

उपभोक्ता अधिकारों के लिए दबाव

अरविंद केजरीवाल का यह कदम ऑटोमोबाइल उद्योग में पारदर्शिता लाने की दिशा में देखा जा रहा है। देश भर में E20 ईंधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच, कंपनियों की चुप्पी ने वाहन मालिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को अपने दावों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार के तकनीकी जोखिम से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उनकी ही है।

अब देखना यह होगा कि क्या ऑटोमोबाइल कंपनियां एक सप्ताह की समय सीमा के भीतर इन सवालों का संतोषजनक जवाब देती हैं या नहीं। यदि कंपनियां इन शर्तों पर लिखित गारंटी देने से बचती हैं, तो यह मुद्दा भविष्य में कानूनी और उपभोक्ता मंचों पर एक बड़ी बहस का रूप ले सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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