अजमेर: सफाई कर्मचारियों का आर-पार का मूड, नगर निगम को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
Ajmer Nagar Nigam Safai Karmchari protest against salary cut, transfers, biometric system. 24 hours ultimatum given. सोमवार को वाल्मीकि समाज संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों सफाई कर्मचारियों ने डाक बंगले से कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली। कलेक्ट्रेट पहुंचकर कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए 24 घंटे के भीतर मांगों पर निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अजमेर में सफाई कर्मचारियों का आक्रोश, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन
अजमेर नगर निगम में कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को वाल्मीकि समाज संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारियों ने डाक बंगले से कलेक्ट्रेट तक एक आक्रोश रैली निकाली। इस दौरान कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप कर दी जाएगी। इसके तहत सामूहिक अवकाश, झाड़ू डाउन आंदोलन और अधिकारियों के घेराव जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
तबादलों और वेतन कटौती से उपजा विवाद
कर्मचारियों का मुख्य विरोध हाल ही में हुए तबादलों और वेतन में की गई कटौती को लेकर है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन जानबूझकर कर्मचारियों को परेशान कर रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि 2 जुलाई 2026 को जारी किए गए स्थानांतरण आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और कर्मचारियों को उनके पुराने वार्डों व मुख्य मार्गों पर वापस तैनात किया जाए।
इसके अलावा, अस्थाई कर्मचारियों के लंबित वेतन भुगतान और ठेकेदार द्वारा वेतन से की गई दो-दो हजार रुपये की कटौती को वापस दिलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। कर्मचारियों ने बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को समाप्त कर पूर्व की भांति उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की है।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
कर्मचारी नेता सन्नी गोयर ने प्रशासन पर वाल्मीकि समाज के कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके निवास स्थान से बहुत दूर तैनात कर दिया गया है, जिससे उनके वेतन का एक बड़ा हिस्सा आने-जाने के किराए में ही खर्च हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि पांच हजार रुपये के वेतन में एक कर्मचारी अपना घर कैसे चलाए और बच्चों का पालन-पोषण कैसे करे।
गोयर ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी समस्याओं को नहीं सुना, तो शहर के होटलों और अस्पतालों सहित सभी क्षेत्रों में सफाई कार्य बंद कर दिया जाएगा। इस स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी समस्या की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति
संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुकेश हेनवाल, उपाध्यक्ष विजय कुमार धंजा, सुमित गोडाले और महामंत्री संजय सोनवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया, तो सफाई कर्मचारी पूर्ण हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल, नगर निगम प्रशासन की ओर से इस अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शहर के सफाई कर्मचारी अब प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं, जबकि शहर में सफाई व्यवस्था के ठप होने की आशंका से हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
