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शिवपुरी में 98 क्विंटल राशन गायब होने का मामला, ढाई महीने बाद भी कार्रवाई न होने पर भड़के ग्रामीण

मई और जून माह का 98 क्विंटल राशन लेकर निकला ट्रक बीच रास्ते से गायब हो गया। ढाई माह बीत जाने के बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने से नाराज ग्रामीण बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 752
शिवपुरी में 98 क्विंटल राशन गायब होने का मामला, ढाई महीने बाद भी कार्रवाई न होने पर भड़के ग्रामीण
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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ख्यावदा कला गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। यहां मई और जून महीने का करीब 98 क्विंटल राशन सरकारी गोदाम से निकलने के बाद बीच रास्ते से ही गायब हो गया। इस घटना को बीते ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

राशन की प्राप्ति को लेकर ट्रांसपोर्टर और दुकान संचालक में विवाद

प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, मई और जून के राशन का वितरण एक साथ किया जाना था। इसके लिए 98 क्विंटल अनाज ट्रक के माध्यम से ख्यावदा कला की उचित मूल्य दुकान के लिए रवाना किया गया था। इस मामले में ट्रांसपोर्टर का दावा है कि उसने राशन सुरक्षित दुकान तक पहुंचा दिया है और उसके पास इसकी प्राप्ति रसीद भी मौजूद है। वहीं, दूसरी ओर दुकान प्रबंधन का कहना है कि जिस रसीद का हवाला दिया जा रहा है, उस पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं और उन्हें राशन की कोई खेप प्राप्त ही नहीं हुई है।

इस विरोधाभास के कारण राशन का बड़ा स्टॉक रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें बड़ी मिलीभगत है, जिसके कारण अनाज गरीबों तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही खुर्दबुर्द कर दिया गया।

तीन-चार महीने से राशन के लिए भटक रहे हितग्राही

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले तीन से चार महीनों से राशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सुगर सिंह नामक ग्रामीण ने बताया कि उन्हें तीन महीने से कोई अनाज नहीं मिला है। वहीं शिवकुमार के अनुसार, गांव के करीब 160 हितग्राही ऐसे हैं जिन्हें पिछले चार महीनों से राशन नहीं मिला है। राशन न मिलने से गरीब परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।

एक अन्य ग्रामीण राधेलाल ओझा ने बताया कि उन्होंने मई के महीने में राशन से भरा ट्रक गांव की दुकान की ओर आते हुए देखा था, लेकिन उसके बाद वह राशन कहां गया, इसका किसी को पता नहीं चला। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सेल्समैन ने राशन वितरण से पहले ही कई हितग्राहियों के अंगूठे लगवा लिए थे, ताकि बाद में गड़बड़ी को छिपाया जा सके।

कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन

लंबे समय तक कोई कार्रवाई न होने से नाराज होकर बुधवार को ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और राशन वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही राशन नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

इस मामले पर एडीएम दिनेश चंद्र शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राशन गायब होने की शिकायत की जांच गंभीरता से की जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि ट्रांसपोर्टर और दुकान प्रबंधन के दावों में भारी अंतर है। एडीएम ने आश्वासन दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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