मैहर से बाहर निकला खूंखार हाथी: बाणसागर डैम में 8 किमी तैरकर शहडोल के जंगलों में पहुंचा
मंगलवार शाम यह टस्कर बाणसागर डैम के अथाह जल में करीब 8 किलोमीटर तैरकर उत्तर शहडोल के जंगलों में पहुंच गया। हाथी के मैहर क्षेत्र से जाने के बाद वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

22 दिनों के आतंक के बाद मैहर सीमा से बाहर हुआ हाथी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भटककर मैहर जिले की अमरपाटन रेंज में दाखिल हुआ कॉलर आईडी युक्त नर जंगली हाथी 'ई-5' आखिरकार जिले की सीमा से बाहर निकल गया है। पिछले 22 दिनों से इस हाथी की मौजूदगी ने स्थानीय निवासियों और वन विभाग की नींद उड़ा रखी थी। मंगलवार की शाम को यह टस्कर बाणसागर डैम के विशाल जल क्षेत्र को पार कर सुरक्षित रूप से शहडोल जिले के जंगलों में पहुंच गया है।
हाथी के मैहर क्षेत्र से बाहर निकलने की पुष्टि होते ही वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है। इस दौरान हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और मैहर वन मंडल की संयुक्त टीमें तैनात रहीं। फिलहाल, हाथी शहडोल की सीमा में सुरक्षित है और वन विभाग की टीमें वहां भी उसकी हर हरकत पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
अमरपाटन में मचाया था भारी उत्पात
यह जंगली हाथी 7 और 8 सितंबर की दरमियानी रात बाणसागर डैम का करीब 5 किलोमीटर लंबा वाटर चैनल पार करके अमरपाटन रेंज में पहुंचा था। क्षेत्र में प्रवेश करते ही हाथी ने मौहारी गांव में जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान उसने न केवल कई घरों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि खेत की रखवाली कर रहे किसान कंछेदी यादव पर हमला कर उनकी जान भी ले ली थी। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था।
घटना के बाद हाथी ने गोरसरी पहाड़ को अपना ठिकाना बना लिया था। वहां से वह लगातार आसपास के रिहायशी इलाकों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा था और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा था। हाथी की आक्रामक गतिविधियों के कारण ग्रामीणों का घरों से निकलना भी दुश्वार हो गया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन में आई बाधाएं
हाथी को काबू करने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम ने 6 कुमकी हाथियों के साथ मोर्चा संभाला था। कॉलर आईडी की मदद से उसकी लोकेशन को लगातार ट्रैक किया जा रहा था। 23 सितंबर को वन विभाग ने हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन भारी बारिश और हाथी के अचानक रेंज से बाहर निकल जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को टालना पड़ा था।
बीती 27 सितंबर की रात करीब 10 बजे हाथी गोरसरी पहाड़ से नीचे उतरा और रामनगर के शहरी इलाके में घुस गया। इससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों ने वाहनों के हॉर्न बजाकर उसे खदेड़ने की कोशिश की। डीएफओ विद्याभूषण मिश्रा के अनुसार, हाथी रामनगर से होते हुए हरदुआ, गंजास, पुरैना और मड़करा के रास्ते मैहर कैंप तक पहुंचा।
8 किलोमीटर तैरकर पार किया डैम
28 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे हाथी ललुआ बीट के कक्ष क्रमांक 637 से बाणसागर डैम के पानी में उतर गया। उसने करीब 8 किलोमीटर की लंबी दूरी पानी में तैरकर तय की। मंगलवार शाम तक वह सुरक्षित रूप से डैम के दूसरी ओर शहडोल जिले के जंगलों में पहुंच गया। वन विभाग की टीम अब शहडोल क्षेत्र में भी उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!