बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण: फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति की साफ, कहा- हमने नहीं दी कोई मंजूरी
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल हुए नए फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट कर दी। कोर्ट ने कहा कि उसने नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी से चुनाव आयोग के दावों पर सवाल
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उपयोग किए जा रहे नए फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि उसने नए फॉर्म-6 को लेकर न तो कोई न्यायिक फैसला सुनाया है और न ही इसे अपनी मंजूरी दी है। यह टिप्पणी तब आई जब अदालत बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयानों में यह दावा किया है कि नए फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी प्राप्त है। इस दलील पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि आयोग का यह दावा तथ्यों से परे है।
अदालत ने कहा- सुनवाई के समय फॉर्म-6 का मुद्दा सामने नहीं था
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जब बिहार एसआईआर (SIR) मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया था, तब नया फॉर्म-6 अदालत के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत ही नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, 'नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं हुआ है। जब बिहार मामले पर सुनवाई हुई थी, तब यह मुद्दा अदालत के सामने था ही नहीं, इसलिए इसे मंजूरी मिलने का प्रश्न ही नहीं उठता।' अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने इसे खारिज कर दिया है, बल्कि यह मुद्दा अदालत के अधिकार क्षेत्र में उस समय आया ही नहीं था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस दौरान मीडिया और संबंधित पक्षों को नसीहत देते हुए कहा कि अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय शब्दों का चयन बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसलों को गलत तरीके से पेश करना या अपनी सुविधानुसार अर्थ निकालना उचित नहीं है।
चुनाव आयोग के दावों पर विवाद
विवाद की जड़ चुनाव आयोग द्वारा 26 सितंबर को जारी की गई एक प्रेस विज्ञप्ति है। इस विज्ञप्ति में आयोग ने मई 2026 में बिहार एसआईआर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था। आयोग ने दावा किया था कि फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। इसी दावे को आधार बनाकर याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद सोमवार को अदालत ने इस पर स्थिति स्पष्ट की।
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर स्पष्टीकरण दिया है। इससे पहले 5 अक्टूबर को भी एक अलग याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोहराया था कि उसने एसआईआर प्रक्रिया में इस्तेमाल हो रहे फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के बदलाव को अपनी सहमति नहीं दी है। अदालत के इस रुख ने अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा दी गई जानकारी की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनाव आयोग को अब अपनी प्रक्रिया में बदलाव करना होगा या वे इस पर कोई नया स्पष्टीकरण देंगे। फिलहाल, अदालत ने यह साफ कर दिया है कि फॉर्म-6 को लेकर जो भी दावे किए जा रहे हैं, उन्हें अदालत की मंजूरी का नाम देना गलत है।
आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या चुनाव आयोग इस मामले में कोई सुधारात्मक कदम उठाता है या फिर इस कानूनी पेंच के कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कोई देरी होती है। फिलहाल, अदालत ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिससे अब चुनाव आयोग के दावों की वैधता पर कानूनी प्रश्नचिह्न लग गया है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!