इस्लामपुर-मानपुर रेललाइन परियोजना पर वित्तीय संकट: 788 करोड़ की योजना का भविष्य अधर में
नालंदा को विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इस्लामपुर-मानपुर रेललाइन परियोजना वित्तीय कसौटी के पेच में उलझ गई है। 41.96 किलोमीटर लंबी और करीब 788.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (एफआईआरआर) महज 0.97 प्रतिशत आंका गया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

वित्तीय मानकों पर अटकी रेल परियोजना
नालंदा को विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इस्लामपुर-मानपुर रेललाइन परियोजना एक बड़े वित्तीय संकट में फंस गई है। लगभग 41.96 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना की अनुमानित लागत 788.27 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन रेलवे के कड़े वित्तीय मानकों के कारण इसका विस्तृत प्राक्कलन (डिटेल्ड एस्टीमेट) अब मंजूरी के लिए संघर्ष कर रहा है।
रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी भी नई रेल लाइन परियोजना को मंजूरी मिलने के लिए उसका वित्तीय आंतरिक प्रतिफल दर (एफआईआरआर) कम से कम 10 प्रतिशत होना अनिवार्य है। हालांकि, इस प्रस्तावित रूट का एफआईआरआर महज 0.97 प्रतिशत आंका गया है। मानक से बेहद कम प्रतिफल होने के कारण रेलवे के वित्त विभाग ने इसके विस्तृत एस्टीमेट को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया है, जिससे इस परियोजना पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
आरटीआई से हुआ खुलासा
परियोजना के ठंडे बस्ते में जाने की जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से सामने आई है। अकबरपुर निवासी शोधार्थी विकास आनंद द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में पूर्व-मध्य रेलवे राजगीर के उप मुख्य अभियंता अभिषेक साव ने स्पष्ट किया कि निर्धारित 10 प्रतिशत की सीमा से काफी नीचे होने के चलते इस प्रोजेक्ट को फाइनेंस क्लियरेंस नहीं मिल सका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस परियोजना के लिए केवल 8 लाख रुपये का टोकन आवंटन ही किया गया था, जो इसके बड़े बजट के सामने नगण्य है।
रेलवे के वित्तीय मानकों के मुताबिक, किसी भी नई रेल परियोजना का आर्थिक जीवन 30 वर्ष माना जाता है। इस अवधि में परिचालन और राजस्व से निवेश की भरपाई के साथ 10 प्रतिशत का सालाना रिटर्न मिलना जरूरी है। इस्लामपुर-मानपुर रूट पर शुरुआती आकलन में संभावित कमाई काफी कम पाई गई है, जिसका अर्थ है कि रेलवे को यहां निवेश की गई पूंजी पर अपेक्षित लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।
बुद्ध सर्किट और स्थानीय विकास पर असर
इस रेलखंड के निर्माण से क्षेत्र की लगभग 40 लाख की आबादी को सुगम और सस्ती यात्रा का लाभ मिलने की उम्मीद थी। यह लाइन बुद्ध सर्किट के दो प्रमुख केंद्रों, नालंदा और बोधगया को सीधा संपर्क प्रदान करती, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की आवाजाही आसान हो जाती। इसके अलावा, इस्लामपुर और हिलसा जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना थी।
वर्ष 2021 में रेलवे बोर्ड को भेजी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, इस ब्रॉडगेज रूट पर इस्लामपुर, मुसौली, जमुआवां, नौडीहा, खिजरसराय, मकसुदपुर, बरेवा और मानपुर समेत 8 स्टेशन और 4 हॉल्ट प्रस्तावित थे। योजना में 3 बड़े पुल, 22 छोटे पुल, 15 अंडरब्रिज और 2 जंक्शन शामिल थे, जो अब नीतिगत असमंजस के कारण अधर में लटके हुए हैं।
आगे की राह
फिलहाल यह परियोजना वित्तीय कसौटी पर खरी नहीं उतरने के कारण ठप पड़ी है। जिले में प्रस्तावित सात रेललाइनों के नेटवर्क में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही थी। अब देखना यह है कि क्या रेलवे बोर्ड इस परियोजना के लिए कोई वैकल्पिक वित्तीय मॉडल तैयार करता है या फिर इसे पूरी तरह से रद्द कर दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर इस रेललाइन की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन वर्तमान वित्तीय स्थिति ने इसे एक बड़ी चुनौती बना दिया है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!