सीहोर: 11 केवी के झूलते तारों से ग्रामीणों की जान पर बन आई, प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
Sehore villagers protest dangerous 11KV power lines posing accident risk. सीहोर जिले में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की कथित लापरवाही को लेकर किसानों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। बिलकिसगंज-चंदेरी मुख्य मार्ग सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में 11 केवी हाईटेंशन लाइन के खंभे खतरनाक तरीके से झुक गए हैं और बिजली के तार जमीन के बेहद करीब झूल रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सीहोर जिले में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बिलकिसगंज-चंदेरी मुख्य मार्ग सहित जिले के कई ग्रामीण इलाकों में 11 केवी हाईटेंशन लाइन के खंभे बुरी तरह झुक गए हैं। इन खंभों से लटकते बिजली के तार जमीन के इतने करीब आ गए हैं कि वे राहगीरों, मवेशियों और किसानों के लिए किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
हादसों का सबब बनी बिजली लाइन
ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र में पहले भी कई गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले साल करंट की चपेट में आने से एक किसान गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहीं, हाल ही में सतीश मेवाड़ा नामक किसान भी इसी तरह की एक घटना में बुरी तरह झुलस गए, जिनका इलाज अभी भी भोपाल के एक अस्पताल में चल रहा है। बार-बार होने वाले इन हादसों के बावजूद विभाग द्वारा कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
ग्रामीणों और किसानों ने इस समस्या को लेकर मोर्चा खोल दिया है। किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर खेती करने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
अधिकारियों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
स्थानीय किसानों ने बताया कि वे इस समस्या के समाधान के लिए अब तक दो बार जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर की गई शिकायतों का कोई ठोस असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग को अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि बिलकिसगंज-चंदेरी मार्ग और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में झुके हुए खंभों को नहीं बदला गया और झूलते तारों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस स्थिति में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और विद्युत वितरण कंपनी की होगी।
विभाग का पक्ष और आगे की स्थिति
दूसरी ओर, बिजली विभाग के अधिकारियों का दावा है कि लाइनों और खंभों के रखरखाव का कार्य नियमित अंतराल पर किया जाता है। विभाग के अनुसार, आवश्यकता के आधार पर मरम्मत की प्रक्रिया निरंतर जारी है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के ये दावे केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
फिलहाल, सीहोर के ग्रामीण इलाकों में बिजली के झूलते तार सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। किसानों की चेतावनी के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिला प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
