संभल: 101 करोड़ के जमीन घोटाले में पूर्व ईओ राजकुमार गुप्ता से 6 घंटे तक पूछताछ
Sambhal 101 crore land scam: High Court ret return, EO Rajkumar Gupta questioned for 6 hours. संभल पुलिस ने नगर पालिका परिषद के तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता से 101 करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन हड़पने के मामले में छह घंटे तक पूछताछ की है। उन्हें रविवार सुबह 8:30 बजे मुरादाबाद जिला कारागार से रिमांड पर लिया गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

संभल जमीन घोटाले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के संभल में 101 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जमीन घोटाले के मामले में पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार गुप्ता से पुलिस ने छह घंटे तक गहन पूछताछ की। उन्हें मुरादाबाद जिला कारागार से रिमांड पर लेकर संभल लाया गया था, जहां विवेचक और सीओ कुलदीप कुमार ने उनसे मामले से जुड़े अहम सवाल किए।
पूछताछ के दौरान मुख्य रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका को वापस लेने की प्रक्रिया और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका पर केंद्रित सवाल पूछे गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पूछताछ जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, रविवार शाम को राजकुमार गुप्ता को वापस जिला कारागार भेज दिया गया।
फर्जी पट्टे के जरिए हड़पने की साजिश
यह पूरा मामला संभल तहसील के तख्तगोसाईन गांव में मुरादाबाद रोड पर स्थित 38 बीघा बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि इस जमीन को नगर पालिका परिषद के नाम से फर्जी पट्टा दिखाकर डीडीसी कोर्ट से नामांतरण कराने की साजिश रची गई थी। वर्ष 2008 में उपसंचालक चकबंदी द्वारा किया गया नामांतरण पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों और पट्टे के आधार पर पाया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद लेखपाल स्पर्श गुप्ता की तहरीर पर 29 जून को 31 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। पांच गाटा संख्या 206, 207, 238, 242/378 और 279 को इस घोटाले का केंद्र माना जा रहा है।
हाईकोर्ट में याचिका और अन्य आरोपियों की तलाश
इस मामले में कई स्थानीय लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं, जिनमें आलम वारसी, आजम खान, मुजाहिद, शाकिर अली, मोहम्मद रफीक, मोहम्मद कासिम और शाकिर सबूर जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस अब इन सभी के कनेक्शन और घोटाले में उनकी संलिप्तता की बारीकी से जांच कर रही है।
पुलिस ने इस मामले में 2 जुलाई को ही तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। वर्तमान में वे शाहजहांपुर नगर निगम में सहायक आयुक्त के पद पर तैनात थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कई टीमें अन्य फरार आरोपियों, जिनमें पालिका के रिटायर्ड मानचित्रकार शहाबुद्दीन और पैरोकार माजिद खान शामिल हैं, की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह
डीडीसी कोर्ट ने 27 जुलाई को वर्ष 2008 के अपने ही पुराने आदेश को पलट दिया है, जो इस मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ है। यह आदेश 27 जून 2026 से प्रभावी माना गया है। प्रशासन का दावा है कि इस जमीन पर नगर पालिका का कोई अधिकार नहीं था, फिर भी उसे हड़पने के लिए सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई।
पुलिस अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जो इस 101 करोड़ के घोटाले के मुख्य सूत्रधारों तक जाती हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
