सहरसा: जन्मजात टेढ़े पैर वाले बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी, सदर अस्पताल में शुरू हुआ विशेष क्लिनिक
Saharsa Sadar Hospital clubfoot clinic launch. Free treatment for congenital clubfoot babies. सहरसा सदर अस्पताल में जन्मजात टेढ़े पैर (क्लबफुट) से पीड़ित बच्चों के लिए निःशुल्क इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार और अनुष्का फाउंडेशन के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन(एमओयू)के बाद अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में क्लबफुट क्लिनिक का संचालन आरंभ हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सहरसा सदर अस्पताल में अब जन्मजात रूप से टेढ़े पैर यानी क्लबफुट की समस्या से जूझ रहे बच्चों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। अस्पताल परिसर में विशेष 'क्लबफुट क्लिनिक' की शुरुआत की गई है, जहां ऐसे बच्चों का उपचार पूरी तरह से निःशुल्क किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार और अनुष्का फाउंडेशन के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते का परिणाम है।
विशेषज्ञों की देखरेख में होगा उपचार
सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने जानकारी दी कि इस क्लिनिक का संचालन अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के अंतर्गत किया जाएगा। सप्ताह में दो दिन विशेषज्ञ चिकित्सक यहां उपलब्ध रहेंगे, जो बच्चों की जांच और उपचार की प्रक्रिया को अंजाम देंगे। सेवा की शुरुआत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. राजेश रंजन द्वारा दो बच्चों के सफल उपचार के साथ की गई है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चों के इलाज के लिए विश्वस्तरीय 'पोंसेटी मेथड' (Ponseti Method) का उपयोग किया जाएगा। इस पद्धति के माध्यम से बिना किसी जटिलता के बच्चों के पैरों को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए अस्पताल के ऑर्थोपेडिक चिकित्सकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर सकें।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत
क्लबफुट का इलाज अक्सर महंगा होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों का उपचार कराने में असमर्थ रहते हैं। इस क्लिनिक के माध्यम से अब उन्हें दवा, प्लास्टर और आवश्यक फुट एब्डक्शन ब्रेस (FAB) जैसी सुविधाएं मुफ्त मिलेंगी। अनुष्का फाउंडेशन इन उपकरणों और कास्टिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग कर रहा है, जिससे परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
उपचार के साथ-साथ क्लिनिक में परामर्श की भी व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षित काउंसलर अभिभावकों को बीमारी की प्रकृति, उपचार के चरणों और बच्चों की देखभाल के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। डीईआईसी की डॉ. अमृता ने बताया कि जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या का समय रहते उपचार करना बेहद जरूरी है, ताकि बच्चा भविष्य में सामान्य जीवन जी सके।
जागरूकता और समय पर पहचान पर जोर
इस पहल को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और आरबीएसके की टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनका मुख्य कार्य नवजात शिशुओं में क्लबफुट के लक्षणों की जल्द पहचान करना है ताकि उन्हें तुरंत क्लिनिक तक पहुंचाया जा सके। समय पर पहचान होने से उपचार की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाती है।
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि सदर अस्पताल में दवाओं से लेकर ऑपरेशन तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार, बिहार के अन्य जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में भी इसी तरह के क्लिनिक स्थापित किए जा रहे हैं ताकि राज्य के हर कोने में बच्चों को यह सुविधा मिल सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
