रतलाम में 40 लाख की लूट का मामला: एफआईआर में 32 घंटे की देरी और शराब ठेकों के दावों पर उठे गंभीर सवाल

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के रतलाम में दिनदहाड़े हुई 40 लाख रुपये की लूट की घटना ने पुलिस और प्रशासन के सामने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी राशि की लूट के बावजूद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने में 32 घंटे का लंबा समय लिया गया। पुलिस ने हालांकि आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है, लेकिन मामले की परतें खुलने पर इसमें बड़े वित्तीय झोल और संदिग्ध कनेक्शन सामने आ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और एफआईआर के दावे
घटना 29 जून की है, जब शहर सराय निवासी मनीष पटवा के घर स्थित कार्यालय से 40 लाख रुपये से भरा बैग लूटा गया। एफआईआर के अनुसार, यह राशि गौरव शर्मा नामक शराब कारोबारी की थी, जिसे रतलाम स्थित उनके शराब ठेकों का चार दिन का कलेक्शन बताया गया था। इस मामले में 30 जून को स्टेशन रोड थाने में एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन शुरुआती जांच में ही पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि जिस कारोबारी के नाम पर यह रकम बताई जा रही है, उसके दावों में भारी विसंगतियां हैं।
पड़ताल में यह सामने आया कि आबकारी विभाग की आधिकारिक आवंटन सूची में रतलाम जिले के भीतर गौरव शर्मा या उनकी फर्म 'मेसर्स गौरव शर्मा' के नाम पर एक भी शराब दुकान आवंटित नहीं है। जिस इलाके में घटना बताई गई, वहां की मदिरा दुकानें अन्य फर्मों के नाम पर दर्ज हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि रतलाम में गौरव शर्मा का कोई कारोबार ही नहीं है, तो फिर यह 40 लाख रुपये का कलेक्शन किस दुकान से आया था?
बड़वानी के ठेके और रतलाम में नकद का खेल
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गौरव शर्मा नामक व्यक्ति के शराब ठेके रतलाम से करीब 202 किलोमीटर दूर बड़वानी जिले में स्थित हैं। इनमें बोकराता और पाटी क्षेत्र की दुकानें शामिल हैं। अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि बड़वानी जैसे दूरस्थ जिले की दुकानों का नकद कलेक्शन रतलाम में क्यों जमा किया जा रहा था? क्या यह राशि किसी बड़े हवाला नेटवर्क का हिस्सा है? मनीष पटवा का नाम पूर्व में भी हवाला प्रकरणों से जुड़ चुका है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो गौरव शर्मा के बड़वानी स्थित ठेकों का सालाना मूल्य करोड़ों में है। ऐसे में चार दिनों के भीतर 40 लाख रुपये का नकद कलेक्शन होना व्यावसायिक रूप से भी संदेहास्पद प्रतीत होता है। इतनी बड़ी राशि को बिना किसी सुरक्षा के इतनी दूर ले जाना और फिर उसे एक निजी घर में रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस की सफाई और आगे की कार्रवाई
रतलाम के एसपी अमित कुमार ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि एफआईआर में देरी का कारण फरियादी मनीष पटवा का खुद थाने न आना था। उन्होंने स्वीकार किया कि फरियादी के हवाला कारोबार से जुड़े होने की चर्चाओं की जांच की जा रही है। एसपी ने कहा कि पुलिस इस मामले की जानकारी अन्य संबंधित एजेंसियों को भी भेज रही है ताकि वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच हो सके।
फिलहाल, पुलिस इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या यह लूट वास्तव में हुई थी या फिर यह किसी बड़े आर्थिक अपराध को छिपाने का एक जरिया था। शराब ठेकों के नाम पर इतनी बड़ी रकम का लेनदेन और उस पर पुलिस की चुप्पी ने स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में अन्य जांच एजेंसियों की दखल के बाद ही इस मामले का असली सच सामने आ पाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
