राजस्थान: रिश्वतखोर जीएम के काले कारनामे, 34 बैंक खातों और 42 एफडी के जरिए खड़ी की करोड़ों की संपत्ति
Rishi Khore GM corruption case 75 lakh gold 34 bank accounts 1.70 crore FD. 75 लाख का आधा किलो सोना, घर में रखता नोट गिनने की मशीन।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

रिश्वतखोरी का खुलासा और एसीबी की कार्रवाई
राजस्थान के प्रतापगढ़ में जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के जनरल मैनेजर और जॉइंट कमिश्नर राजीव गर्ग के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। एसीबी ने गर्ग को 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई जांच में अधिकारी की काली कमाई का ऐसा जाल सामने आया है जिसने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।
आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उसने अपनी अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए बैंकों का सहारा लिया। जांच में पता चला कि गर्ग ने अपने नाम पर 34 बैंक खाते खुलवा रखे थे और 42 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के जरिए करीब 1.70 करोड़ रुपये जमा कर रखे थे। एसीबी की लंबी जांच के बाद अब आय से अधिक संपत्ति का एक नया मामला दर्ज किया गया है।
एक दिन में लाखों का लेन-देन और लग्जरी जीवनशैली
एसीबी की छानबीन में सामने आया कि राजीव गर्ग के पास 25 से अधिक क्रेडिट और डेबिट कार्ड थे। उसकी वित्तीय गतिविधियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल 6 मार्च 2023 को ही उसने अपने 7 अलग-अलग बैंक खातों में 14.72 लाख रुपये जमा किए थे। घर की तलाशी के दौरान एसीबी को नोट गिनने की मशीन और 553 ग्राम सोना भी मिला, जो उसकी भ्रष्ट कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, गर्ग का रहन-सहन उसके सरकारी वेतन से कहीं अधिक महंगा था। 1996 में सरकारी सेवा में आने के बाद से ही उसने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। एसीबी ने जब उसके खर्चों और आय का मिलान किया, तो पाया कि उसकी कुल संपत्ति वैध आय से 99 फीसदी अधिक है।
आय से अधिक संपत्ति का गणित
एसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 तक गर्ग ने वेतन और अन्य वैध स्रोतों से करीब 1.76 करोड़ रुपये अर्जित किए थे। वहीं, उसके द्वारा किए गए खर्चों और जुटाई गई संपत्ति का मूल्य 2.71 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। इन आंकड़ों के आधार पर एसीबी ने निष्कर्ष निकाला है कि आरोपी ने 1.73 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक बनाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एसीबी द्वारा आंकी गई यह संपत्ति बाजार मूल्य से काफी कम हो सकती है। यदि इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार भाव निकाला जाए, तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल, एसीबी की टीम मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इस भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
मामले की पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले की शुरुआत 2024 में हुई थी, जब उद्योग विभाग के ही एक पूर्व डिप्टी कमिश्नर ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि सातवें वेतन आयोग के एरियर के भुगतान के लिए राजीव गर्ग ने उनसे रिश्वत की मांग की थी। इससे पहले भी गर्ग ने 50 हजार रुपये की रिश्वत ली थी और बाद में 3 लाख रुपये की और मांग की थी।
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद जाल बिछाया और गर्ग को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसके निर्माण नगर स्थित फ्लैट को सील कर दिया गया और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई। इस जांच ने ही बैंक खातों और एफडी के जरिए काले धन को सफेद करने के उसके पूरे खेल को उजागर कर दिया।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
