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सीवान में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 2 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन में युवक गिरफ्तार

Siwan cyber fraud network busted, 2 crore suspicious transactions. सीवान नगर थाना पुलिस ने अवैध धन के लेन-देन और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने हाफिजी चौक स्थित एक दुकान पर छापेमारी कर शाहिद अली (21) को गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 738
सीवान में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 2 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन में युवक गिरफ्तार
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सीवान में अवैध वित्तीय नेटवर्क का भंडाफोड़

बिहार के सीवान में नगर थाना पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी और अवैध धन के लेनदेन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने हाफिजी चौक स्थित एक दुकान पर गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की, जहां से 21 वर्षीय शाहिद अली को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में सक्रिय साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह की परतें खोल दी हैं।

जांच में सामने आया है कि पिछले एक साल के भीतर इस नेटवर्क के जरिए करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। आरोपी शाहिद अली ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम का इस्तेमाल कर कई बैंकों में खाते खुलवा रखे थे, जिनका उपयोग अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था।

परिजनों के नाम पर खोले गए थे बैंक खाते

पुलिस पूछताछ और शुरुआती जांच में पता चला है कि शाहिद ने अपने मामा इरफान अहमद उर्फ मोनू के निर्देश पर यह पूरा जाल बिछाया था। उसने अपनी मां निशा फातमा और पिता मो. जाकिर के नाम पर करीब 10 बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों में एक्सिस बैंक, पीएनबी, एचडीएफसी, एसबीआई, सेंट्रल बैंक और आईसीआईसीआई जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड के साथ-साथ तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन और तीन सक्रिय सिम कार्ड शामिल हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

कमीशन के लिए काम कर रहा था आरोपी

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी इरफान अहमद उर्फ मोनू हर महीने 30 से 40 लाख रुपये की नगद राशि शाहिद तक पहुंचाता था। शाहिद का काम उन पैसों को मामा द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करना था, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि का लेनदेन होने के बावजूद शाहिद ने कभी आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल नहीं किया।

इस मामले में पुलिस ने शाहिद के साथ-साथ उसकी मां निशा फातमा, पिता मो. जाकिर और कथित मास्टरमाइंड मामा इरफान अहमद उर्फ मोनू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब इन सभी बैंक खातों के ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह पैसा साइबर ठगी का है या हवाला का।

आगे की कार्रवाई और जांच का दायरा

नगर थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी प्राथमिक चरण में है। डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बैंक खातों का विवरण किसी अनजान व्यक्ति को न दें और किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय थाने को दें। इस मामले में पुलिस की सक्रियता से साइबर अपराधियों के हौसले पस्त होने की उम्मीद है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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