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मध्य प्रदेश के 24 जिलों पर मंडराया सूखे का खतरा, सरकार ने शुरू की विशेष तैयारी

Madhya Pradesh drought alert 24 districts at risk. मध्य प्रदेश में इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका के बीच राज्य सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के बाद सरकार ने 24 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर ली है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1K
मध्य प्रदेश के 24 जिलों पर मंडराया सूखे का खतरा, सरकार ने शुरू की विशेष तैयारी
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मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। इस संकट को देखते हुए राज्य प्रशासन ने कमर कस ली है और एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है ताकि किसानों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

उज्जैन संभाग पर सबसे अधिक संकट

सबसे गंभीर स्थिति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन में देखी जा रही है। यहां वर्षा की कमी का असर सबसे अधिक होने की संभावना है। मानसून के आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जून से 1 जुलाई के बीच राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 139.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 92.4 मिमी बारिश ही दर्ज हुई है, जो कि 47 मिमी की बड़ी कमी है।

IMD के अनुसार, इस बार मानसून की कुल वर्षा सामान्य का केवल 90 से 94 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कई जिलों में तो बारिश का घाटा 20 से 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यदि आने वाले हफ्तों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो खरीफ की फसलों पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है।

कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त रणनीति

संभावित सूखे से निपटने के लिए कृषि और राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। सरकार ने 24 प्रभावित जिलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। सात जिलों में तो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माइक्रो प्लानिंग की जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को तकनीकी सलाह दी जा रही है और जिला स्तर पर अधिकारियों को रोजाना स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का मुख्य जोर किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर है। इसमें दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा, रिज एंड फरो और डायरेक्ट सीडेड राइस जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

जल संरक्षण और राहत के इंतजाम

सिंचाई के लिए सरकार ने मनरेगा के तहत खेत तालाबों के निर्माण और जल संरचनाओं की मरम्मत का काम तेज करने का निर्णय लिया है। वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसान समय पर बुवाई कर सकें। सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके।

राजस्व विभाग ने वर्ष 2020 की सूखा नीति के तहत अपनी तैयारी पूरी कर ली है। यदि स्थिति बिगड़ती है, तो खरीफ फसलों के लिए 31 अक्टूबर और रबी फसलों के लिए 31 मार्च तक सूखे की घोषणा करने का प्रावधान रखा गया है। वर्तमान में राहत कार्यों के लिए 20.9 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है, और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त बजट जारी करने का आश्वासन दिया गया है। हर जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है ताकि संकट के समय त्वरित निर्णय लिए जा सकें।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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