प्रतापगढ़ में जर्जर मकानों पर प्रशासन का कड़ा प्रहार: 457 भवनों की पहचान, 304 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा
Pratapgarh district administration action against dilapidated buildings after fatal house collapse. प्रतापगढ़ में एक परिवार के छह लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन जर्जर भवनों को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बरसात के मौसम में संभावित हादसों को रोकने के लिए पूरे जिले में जर्जर मकानों की पहचान, उन्हें सील करने और उनमें रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का अभियान तेज कर दिया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हादसे के बाद जागा प्रशासन, शुरू हुआ सर्वे का दौर
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। एक जर्जर मकान के ढह जाने से एक ही परिवार के छह सदस्यों की असामयिक मौत के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के प्रति सख्त रुख अपना लिया है। बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए पूरे जिले में जर्जर और खतरनाक भवनों की पहचान करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
जिलाधिकारी अभिषेक पांडे के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष सर्वेक्षण में अब तक कुल 457 जर्जर भवनों को चिह्नित किया गया है। इन भवनों की स्थिति अत्यंत नाजुक पाई गई है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते थे। प्रशासन ने इन सभी मकानों के स्वामियों को तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी कर दिए हैं और उन्हें भवन खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
304 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर किया गया शिफ्ट
चिह्नित किए गए 457 भवनों में से 304 मकान ऐसे थे जिनमें परिवार निवास कर रहे थे। इन परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से खाली करा लिया है। इन लोगों को रहने के लिए रैन बसेरों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के बड़े हॉल और पंचायत भवनों में अस्थायी व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
नगर कोतवाली क्षेत्र के दहिलामऊ मोहल्ले में नगर पालिका की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए अनिल गुप्ता के परिवार को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया। मकान मालिक को औपचारिक नोटिस देने के बाद, परिवार को अचलपुर स्थित रैन बसेरे में शिफ्ट कराया गया। प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई स्थानीय निवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
शेष भवनों पर भी होगी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, अभी भी 153 ऐसे जर्जर भवन हैं जिनमें लोग रह रहे हैं। इन परिवारों को भी बहुत जल्द सुरक्षित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया जारी है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन सभी परिवारों को शिफ्ट करने के बाद, इन जर्जर ढांचों को नियमानुसार ध्वस्त किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के मलबे के गिरने या मकान ढहने का खतरा न रहे।
जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हालिया घटना बेहद दुखद थी और प्रशासन भविष्य में ऐसी किसी भी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को खाली कराना केवल एक शुरुआत है, इसके बाद चरणबद्ध तरीके से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जाएगी ताकि जिले को सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई भी भवन जर्जर अवस्था में है और वहां लोग रह रहे हैं, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय नगर पालिका या तहसील कार्यालय को दें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बरसात के दौरान होने वाले हादसों को शून्य पर लाना है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
