मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया बदली: जमानत राशि में 60% की बढ़ोतरी, अब अलग बैंक खाते से होगा खर्च
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किए हैं। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के निर्वाचन, नामांकन, सिक्योरिटी डिपाजिट (जमानत राशि), चुनावी खर्च तथा पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मध्यप्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
जमानत राशि में 60 प्रतिशत तक का इजाफा
संशोधित नियमों के तहत, महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए जमानत राशि में 60 फीसदी की वृद्धि की गई है। अब महापौर का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को 20 हजार रुपये के बजाय 32 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए यह राशि 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 24 हजार रुपये कर दी गई है। वर्ष 2022 के चुनावों में लागू पुरानी दरों को अब पूरी तरह बदल दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नामांकन की अंतिम तिथि सूचना प्रकाशन के सातवें दिन होगी। यदि उस दिन कोई सार्वजनिक अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस को अंतिम तिथि माना जाएगा। साथ ही, एक ही पद के लिए एक से अधिक नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
वित्तीय पारदर्शिता के लिए अनिवार्य बैंक खाता
सरकार ने चुनावी खर्चों पर नजर रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के सभी उम्मीदवारों को चुनाव संबंधी खर्च के लिए एक अलग और स्वतंत्र बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। चुनाव के दौरान होने वाला हर लेन-देन इसी खाते के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय इस बैंक खाते की पूरी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। नामांकन की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक का पूरा चुनावी खर्च इसी खाते से होगा और इसका विस्तृत लेखा-जोखा चुनाव आयोग को सौंपना होगा। यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित समय के भीतर अपने खर्च का हिसाब नहीं देता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
पद से वापस बुलाने और रिक्त पदों की प्रक्रिया
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने (रिकॉल) की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और नगर निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। यह नियम जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
इसके अलावा, यदि किसी कारणवश (जैसे मृत्यु, त्यागपत्र या निर्वाचन रद्द होने) महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद रिक्त होता है, तो इसकी सूचना जिला निर्वाचन अधिकारी को तत्काल प्रभाव से देनी होगी। इन सभी संशोधनों का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले खर्चों पर प्रभावी नियंत्रण रखना है।
राज्य सरकार की ओर से जारी ये नए नियम आने वाले नगरीय निकाय चुनावों में पूरी तरह प्रभावी होंगे। सभी राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों को अब अपनी चुनावी रणनीति और बजट को इन नए नियमों के अनुरूप ही तैयार करना होगा।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!