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पटना PMCH में नर्सों का कार्य बहिष्कार खत्म, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

Patna PMCH OPD OT services halted. 52 surgeries postponed as nurses protest. पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में मंगलवार को नर्सों ने कार्य बहिष्कार किया था। इस दौरान 8 घंटे तक इमरजेंसी सेवा के साथ-साथ ओटी और दूसरी जरूरी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई थी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 961
पटना PMCH में नर्सों का कार्य बहिष्कार खत्म, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
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पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में मंगलवार को नर्सिंग स्टाफ के कार्य बहिष्कार के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गईं। करीब आठ घंटे तक चली इस हड़ताल के चलते अस्पताल की इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। इस दौरान अस्पताल में निर्धारित 110 में से 52 बड़े ऑपरेशन टालने पड़े, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

नर्सों की वापसी, जूनियर डॉक्टरों का मोर्चा

अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के साथ हुई वार्ता और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सात सदस्यीय जांच समिति गठित करने के आश्वासन के बाद नर्सें शाम करीब चार बजे काम पर लौट आईं। हालांकि, नर्सों के काम पर लौटने के बाद अब जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार शाम से ओपीडी और जनरल वार्ड की सेवाएं बंद कर दी हैं, हालांकि आपातकालीन सेवाएं, आईसीयू और लेबर रूम को इससे बाहर रखा गया है।

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गठित की गई सात सदस्यीय जांच समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, अस्पताल में नर्सिंग सेवाओं के बाधित होने से मरीजों को समय पर दवा और इंजेक्शन मिलने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

मरीजों की दुश्वारियां और वार्डों का हाल

हड़ताल के दौरान वार्डों में स्थिति काफी गंभीर रही। कई गंभीर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल सका, जिसके कारण उनके परिजनों ने अस्पताल परिसर में काफी हंगामा किया। स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि वार्डबॉय को मरीजों को ड्रिप लगाने और इंजेक्शन देने जैसे काम करने पड़े। कुछ मामलों में सीनियर डॉक्टरों ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई निर्धारित सीजेरियन ऑपरेशन नहीं हो सके, जिससे मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करने पर मजबूर होना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि घंटों तक कोई भी नर्सिंग स्टाफ वार्ड में नहीं पहुंचा, जिससे मरीजों की हालत बिगड़ती गई।

विवाद की जड़: मारपीट का आरोप

यह पूरा विवाद सोमवार को एक मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ। मृतक अरविंद सिंह, जो कि अस्पताल में कार्यरत सीनियर नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति थे, का इलाज के दौरान निधन हो गया था। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद जूनियर डॉक्टरों और नर्स के परिजनों के बीच तीखी बहस और झड़प हो गई।

नर्स लक्ष्मी कुमारी ने आरोप लगाया है कि जब उनके बेटे ने इलाज में लापरवाही का विरोध किया, तो जूनियर डॉक्टरों ने उसे बंधक बनाकर पीटा। बीच-बचाव करने पहुंचीं लक्ष्मी कुमारी के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। इसी घटना के विरोध में नर्सों ने सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए मंगलवार को कार्य बहिष्कार किया था।

फिलहाल, अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों की कतारें लंबी हो गई हैं और अस्पताल में तनाव का माहौल बना हुआ है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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