पंचकूला: रिटायर्ड चीफ इंजीनियर से 7.46 लाख की साइबर ठगी, फर्जी ऐप के जरिए हैक किया मोबाइल
पंचकूला के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर को फर्जी ऐप डाउनलोड करवा कर उसके खाते से 7.46 लाख रुपए निकाल लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

गूगल सर्च से शुरू हुआ ठगी का जाल
पंचकूला में एक रिटायर्ड चीफ इंजीनियर को फर्जी ऐप डाउनलोड करना भारी पड़ गया। सेक्टर-20 स्थित सनसिटी परिक्रमा के निवासी अनिल कुमार गुप्ता, जो हरियाणा सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हैं, ने बाथरूम की सफाई के लिए गूगल पर अर्बन कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया था। सर्च रिजल्ट में मिले एक नंबर पर कॉल करना उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर विश्वास जीता और सर्विस स्लॉट बुक करने के नाम पर एक ऐप डाउनलोड करने का निर्देश दिया। शुरुआत में ऐप ठीक से काम नहीं कर रही थी, जिसके बाद जालसाजों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक दूसरी संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाई। इस ऐप को इंस्टॉल करते ही पीड़ित का मोबाइल फोन पूरी तरह से हैक हो गया और वह अनियंत्रित हो गया।
कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए बैंक खातों में सेंध
मोबाइल हैक होने के बाद पीड़ित को तब शक हुआ जब उनकी बेटी ने बताया कि उनका फोन पिछले कई घंटों से लगातार बिजी आ रहा है। मामले की गंभीरता को समझते हुए जब उन्होंने एयरटेल कस्टमर केयर से संपर्क किया, तो खुलासा हुआ कि उनके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कर दी गई थी। ठगों ने इसी तकनीक का फायदा उठाकर उनके बैंक खातों का एक्सेस हासिल कर लिया।
जांच में सामने आया कि जालसाजों ने आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से 5,49,580 रुपए और एचडीएफसी बैंक खाते से 73,000 रुपए उड़ा लिए। कुल मिलाकर पीड़ित को 7,46,780 रुपए का चूना लगाया गया। घटना का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत अपने बैंक खाते और कार्ड ब्लॉक करवाए, लेकिन तब तक ठग अपना काम कर चुके थे।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाना सेक्टर-20 में दर्ज कराई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच एएसआई सतीश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अब उन डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है जो ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए थे।
पुलिस के अनुसार, ठगों ने जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया और जिस तरह से कॉल फॉरवर्डिंग की गई, उससे गिरोह की कार्यप्रणाली का पता लगाया जा रहा है। हालांकि, पीड़ित द्वारा फोन रीसेट कर देने के कारण फर्जी ऐप और व्हाट्सएप नंबर से जुड़े कुछ साक्ष्य मिट गए हैं, लेकिन बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
साइबर सुरक्षा के प्रति सावधानी जरूरी
यह मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि इंटरनेट पर सर्च किए गए कस्टमर केयर नंबरों पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना अनिवार्य है। विशेष रूप से स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस वाली ऐप्स के जरिए ठग लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल में कोई भी ऐप इंस्टॉल न करें और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ऐप डाउनलोड करने का दबाव बनाता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही संपर्क करें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!