लखनऊ: दवा कारोबारियों का दावा, भ्रामक खबरों से 20 दिन में 35 करोड़ का नुकसान
Uttar Pradesh medicine traders report major business decline due to misleading media news. उत्तर प्रदेश में नकली, खराब और नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की लगातार कार्रवाई के बीच दवा कारोबारियों ने दावा किया है कि कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित भ्रामक और अप्रमाणित खबरों से पिछले 20 दिनों में करीब 35 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। लखनऊ केमिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर ऐसे मामलों की

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा नकली और अधोमानक दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के बीच दवा व्यापारियों ने एक गंभीर चिंता व्यक्त की है। लखनऊ केमिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि कुछ मीडिया माध्यमों द्वारा बिना पुष्टि किए प्रसारित की जा रही खबरों के कारण दवा कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। व्यापारियों का दावा है कि पिछले 20 दिनों में भ्रामक सूचनाओं के चलते लगभग 35 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
निरीक्षण को छापेमारी बताकर पेश करने का आरोप
एसोसिएशन ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि एफएसडीए की सामान्य प्रक्रिया के तहत होने वाले निरीक्षण और दवाओं के नमूने लेने की कार्रवाई को मीडिया में 'छापेमारी' के रूप में दिखाया जा रहा है। बिना किसी ठोस जांच रिपोर्ट या लैब परिणाम के किसी प्रतिष्ठान को सीधे तौर पर दोषी ठहराने से उनकी वर्षों की साख धूमिल हो रही है।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि दवा व्यापारी अवैध और मादक दवाओं के खिलाफ सरकार और प्रशासन के अभियान का पूरी तरह समर्थन करते हैं। यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई का स्वागत है। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मीडिया ट्रायल के जरिए व्यापारियों को बदनाम करना अनुचित है।
भुगतान और व्यापारिक लेन-देन पर गहरा असर
दवा कारोबारियों के अनुसार, इस तरह की खबरों का सीधा असर उनके दैनिक कामकाज पर पड़ रहा है। कई ग्राहकों और व्यापारिक साझेदारों ने यह कहते हुए भुगतान रोक दिए हैं कि संबंधित प्रतिष्ठान पर कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में विश्वास का संकट पैदा हो गया है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने अपनी चिंता जताते हुए कहा कि बिना तथ्यात्मक पुष्टि के किसी भी दुकान या फर्म को नकली दवाओं के कारोबार से जोड़ना पूरे दवा उद्योग की छवि को खराब करता है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि समाज में व्यापारियों के प्रति गलत धारणा भी बन रही है।
फेक न्यूज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग
लखनऊ केमिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि भ्रामक और तथ्यहीन खबरें प्रसारित करने वाले समाचार माध्यमों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस से भी आग्रह किया है कि फेक न्यूज फैलाने वालों पर लगाम लगाई जाए ताकि ईमानदार व्यापारियों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रह सके।
व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब तक किसी मामले में दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी भी प्रतिष्ठान का नाम सार्वजनिक रूप से बदनाम न किया जाए। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस ज्ञापन पर संज्ञान लेगा और भविष्य में ऐसी भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए उचित कदम उठाएगा।
फिलहाल, दवा व्यापारी इस स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं और वे चाहते हैं कि प्रशासन और मीडिया के बीच एक ऐसा समन्वय बने जिससे सही जानकारी ही जनता तक पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में चल रहे औषधि प्रशासन के अभियान के साथ-साथ मीडिया की जिम्मेदारी और व्यापारिक सुरक्षा के मुद्दे को भी चर्चा में ला दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
