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मध्य प्रदेश सरकार ने लिया 2500 करोड़ का नया कर्ज, कुल कर्ज का आंकड़ा 5.42 लाख करोड़ के पार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के एक दिन पहले सरकार ने एक महीने तक चलने वाले सेवा कार्यक्रमों को देखते हुए बुधवार को फिर 2500 करोड़ रुपए के तीन अलग-अलग कर्ज लिए हैं। यह कर्ज सरकारी सिक्योरिटी और री इश्यू के माध्यम से आरबीआई के जरिये हुए नीलामी द्वारा लिए गए हैं।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

16 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश सरकार ने लिया 2500 करोड़ का नया कर्ज, कुल कर्ज का आंकड़ा 5.42 लाख करोड़ के पार
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विकास कार्यों के लिए आरबीआई के जरिए जुटाया गया फंड

मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर बाजार से बड़ी राशि का कर्ज लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले, राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया पूरी करते हुए 2500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज जुटाया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस राशि का उपयोग राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं और उत्पादक योजनाओं के वित्त पोषण के लिए किया जाएगा।

यह कर्ज सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की नीलामी और री-इश्यू के जरिए प्राप्त किया गया है। नीलामी की प्रक्रिया मंगलवार को संपन्न हुई थी, जिसके बाद बुधवार को सरकार को यह राशि प्राप्त हुई। राज्य सरकार द्वारा इस वित्त वर्ष में लिया गया यह कोई पहला कर्ज नहीं है; इससे पहले 1 सितंबर को भी सरकार ने 3,600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

राज्य पर कर्ज का बढ़ता बोझ

बुधवार को लिए गए 2500 करोड़ रुपये के नए कर्ज के बाद, चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 53,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस ताजा कर्ज के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार पर कुल बकाया कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपये हो गया है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य के बजट और विकास कार्यों के लिए लगातार लिए जा रहे ये कर्ज आने वाले समय में वित्तीय प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकते हैं।

सरकार ने इस कर्ज को तीन अलग-अलग किस्तों में लिया है, जिनकी अवधि और ब्याज दरें भिन्न हैं। पहली किस्त 700 करोड़ रुपये की है, जो 8 साल की अवधि के लिए ली गई है। इस पर 7.39% की दर से ब्याज देय होगा और इसका मूलधन 22 जुलाई 2034 को चुकाया जाएगा। इस कर्ज का ब्याज भुगतान हर छह महीने में किया जाएगा।

दूसरी किस्त 900 करोड़ रुपये की है, जिसे 12 साल की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर 7.58% सालाना ब्याज दर निर्धारित की गई है। इसका भुगतान 22 जुलाई 2038 तक किया जाना है। वहीं, तीसरी और सबसे लंबी अवधि वाली किस्त भी 900 करोड़ रुपये की है, जिसकी अवधि 22 साल रखी गई है। इस पर 7.66% की दर से ब्याज लगेगा और इसकी अदायगी 19 अगस्त 2048 तक पूरी की जाएगी।

निवेशकों के लिए क्या हैं शर्तें

सरकार द्वारा जारी इन प्रतिभूतियों को बैंकों के लिए वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के तहत पात्र निवेश माना गया है। इसका अर्थ है कि बैंक इन सरकारी बॉन्ड्स में निवेश कर अपनी अनिवार्य आरक्षित आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा, ये प्रतिभूतियां 'रेडी फॉरवर्ड फैसिलिटी' के लिए भी योग्य होंगी, जिससे बाजार में तरलता बनी रहेगी।

राज्य सरकार का कहना है कि ये कर्ज राज्य की आधारभूत संरचना और जनहित की योजनाओं को गति देने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, विपक्ष और आर्थिक जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन कर्जों का उपयोग किस प्रकार से उत्पादक संपत्तियां बनाने में करती है, ताकि भविष्य में ब्याज और मूलधन की अदायगी का बोझ राज्य के राजस्व पर न पड़े।

आने वाले महीनों में राज्य सरकार के सामने अपने वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने और विकास कार्यों को जारी रखने के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, सरकार ने इन कर्जों के जरिए अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा कर लिया है, लेकिन लंबी अवधि के लिए यह कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर डालता रहेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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