पटना में डेंगू का प्रकोप: 23 दिनों में 140 नए मामले, अस्पतालों में अलर्ट
पटना में डेंगू के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। सितंबर के सिर्फ 23 दिनों में करीब 140 नए मरीज मिले हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार की राजधानी पटना में डेंगू के मामलों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है। सितंबर के शुरुआती 23 दिनों में ही शहर में डेंगू के करीब 140 नए मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को 9 नए मरीज मिलने के बाद इस सीजन में कुल संक्रमितों की संख्या 307 तक पहुंच गई है। संक्रमण की इस रफ्तार ने स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
अस्पतालों में विशेष वार्ड और बेड की व्यवस्था
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रमुख सरकारी अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में डेंगू के मरीजों के लिए 20 बेड का एक समर्पित वार्ड आरक्षित किया गया है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इस सीजन में अब तक 52 मरीजों को यहां भर्ती कर उपचार दिया गया है। सभी भर्ती मरीजों को मच्छरदानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
दूसरी ओर, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भी डेंगू के मरीजों का इलाज जारी है। संस्थान में अब तक 79 मरीजों को भर्ती किया गया है। दोनों बड़े अस्पतालों को मिलाकर अब तक 134 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
संक्रमण के हॉटस्पॉट और लक्षण
स्वास्थ्य विभाग ने पटना के कई इलाकों को डेंगू का हॉटस्पॉट घोषित किया है। इनमें कंकड़बाग, हनुमान नगर, जक्कनपुर, भूतनाथ रोड, बाजार समिति, कदमकुआं, बोरिंग रोड, राजाबाजार और अनीसाबाद जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में मच्छरों के पनपने की अधिक संभावना है, जिसके कारण प्रशासन ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज बुखार, शरीर में असहनीय दर्द, लगातार उल्टी, पेट दर्द और प्लेटलेट्स में अचानक गिरावट डेंगू के गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल में भर्ती होकर निगरानी में रहने की सलाह दी जा रही है। प्लेटलेट्स काउंट की नियमित जांच और समय पर दवाएं इस बीमारी से उबरने के लिए अनिवार्य हैं।
प्रशासन की तैयारी और चुनौतियां
अस्पतालों में बेड की उपलब्धता के साथ-साथ जांच किट और दवाओं का स्टॉक भी सुनिश्चित किया जा रहा है। हालांकि, IGIMS जैसे संस्थानों में बेड की सीमित संख्या और वहां मच्छरदानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। डेंगू के मरीज से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है, इसलिए अस्पताल परिसर में मच्छरों पर नियंत्रण पाना एक बड़ी प्राथमिकता है।
आने वाले दिनों में यदि मामलों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो अस्पतालों में बेड की संख्या में और इजाफा करना पड़ सकता है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के लिए पूरी सावधानी बरतें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!