मध्य प्रदेश में व्यापारियों का 'नो-UPI डे', 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर विरोध
मध्य प्रदेश में आज नो-UPI डे रहेगा। भोपाल, इंदौर समेत पूरे प्रदेश के व्यापारी ₹2000 से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेंगे।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

डिजिटल भुगतान शुल्क के खिलाफ लामबंद हुए व्यापारी
मध्य प्रदेश में आज व्यापारी वर्ग ने 'नो-UPI डे' का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश भर के व्यापारी 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में किए जा रहे इस विरोध का मुख्य उद्देश्य डिजिटल लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क का विरोध करना है।
विरोध के प्रतीक के रूप में, कई व्यापारी अपने डिजिटल पेमेंट स्कैनर को काले कपड़े से ढककर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि यह निर्णय व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा, जिसे वे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, इस विरोध को स्वैच्छिक रखा गया है और किसी भी व्यापारी पर इसे थोपा नहीं जाएगा।
आर्थिक बोझ और थोक कारोबारियों की चिंता
व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया नियम छोटे और थोक व्यापारियों की कमर तोड़ देगा। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। थोक किराना और तेल जैसे व्यवसायों में अधिकांश लेनदेन 2,000 रुपये से ऊपर के होते हैं, जिससे व्यापारियों को हर ट्रांजैक्शन पर नुकसान उठाना पड़ेगा।
इंदौर में मंगलवार रात को व्यापारियों ने मशाल रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। रीगल स्क्वायर पर आयोजित इस प्रदर्शन में 150 से अधिक व्यापारियों ने हिस्सा लिया और 'यूपीआई पर चार्ज बंद करो' के नारे लगाए। व्यापारियों का तर्क है कि यदि एक दिन में 2,000 रुपये से अधिक के कई लेनदेन होते हैं, तो व्यापारी को भारी कमीशन देना पड़ेगा, जो उनके मुनाफे को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
पेट्रोल पंपों पर भी असर की तैयारी
इस विरोध प्रदर्शन का दायरा केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपना लिया है। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 16 अक्टूबर से राज्य के 4,700 पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक के बिलों के लिए यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। पेट्रोल पंप संचालक भी आज के सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर 300 रुपये का अधिकतम शुल्क निर्धारित किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह शुल्क ग्राहकों के बजाय सीधे व्यापारियों से वसूला जाएगा, जो डिजिटल इंडिया के विजन के विपरीत है। सरकार के इस कदम को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश है और वे इस शुल्क को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
आगे की स्थिति
आज के सांकेतिक विरोध के बाद व्यापारी संगठनों की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, प्रदेश के प्रमुख बाजारों में डिजिटल भुगतान को लेकर व्यापारियों की यह लामबंदी आम ग्राहकों के लिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि सरकार और व्यापारियों के बीच इस शुल्क को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों का स्पष्ट मानना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए शुल्क लगाना एक गलत कदम है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि व्यापारियों पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को खत्म किया जाए ताकि व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!