कुरुक्षेत्र नगर परिषद में टेंडर और सफाई व्यवस्था को लेकर हंगामा, जजपा नेता और चेयरपर्सन प्रतिनिधि में तीखी बहस
हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर में सफाई व्यवस्था, नालों की सफाई और नगर परिषद (नप) थानेसर के टेंडरों को लेकर जजपा नेता की चेयरपर्सन माफी ढांडा के पति मलकीत ढांडा से बहस हो गई। जजपा की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके योगेश शर्मा ने नप की कार्यप्रणाली को लेकर कई आरोप लगाए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

नगर परिषद कार्यालय में आमने-सामने आए नेता
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में नगर परिषद थानेसर के कामकाज और सफाई व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को जजपा नेता योगेश शर्मा और नगर परिषद चेयरपर्सन माफी ढांडा के पति मलकीत ढांडा के बीच कार्यालय में तीखी बहस हुई। योगेश शर्मा ने शहर में नालों की सफाई और टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं, जबकि चेयरपर्सन प्रतिनिधि ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब योगेश शर्मा ने कार्यालय में मौजूद दो कुर्सियों पर सवाल उठाते हुए मलकीत ढांडा की उपस्थिति की वैधता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पार्षद प्रतिनिधि के रूप में उन्हें अधिकारियों को निर्देश देने या फाइलों पर हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
टेंडर प्रक्रिया में कमीशनखोरी और सफाई के दावों पर सवाल
योगेश शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर के विकास कार्यों के लिए जारी टेंडरों में ठेकेदार 40 प्रतिशत तक कम रेट पर काम लेने को तैयार हो जाते हैं, जो गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि इसके पीछे हर फाइल पर 2 प्रतिशत कमीशन का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि कागजों में सफाई के लिए एक साल में दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन धरातल पर नालों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने चुनौती दी कि अधिकारी उनके साथ शहर का दौरा करें, जहां वे खुद गटर खोलकर सफाई की हकीकत दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि पिछले एक साल में सफाई कार्यों पर खर्च की गई राशि और ठेकेदारों को किए गए भुगतान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।
प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय समस्याओं का मुद्दा
योगेश शर्मा ने शहर की बदहाली का उदाहरण देते हुए बताया कि एक स्थानीय वकील को अपनी गली का निर्माण खुद के खर्च पर करवाना पड़ा, जो नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा तमाचा है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान शहर के कई सेक्टरों और कॉलोनियों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, ताकि शहर के विकास के लिए आवंटित करोड़ों रुपयों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
चेयरपर्सन प्रतिनिधि का बचाव
आरोपों का जवाब देते हुए मलकीत ढांडा ने कहा कि वे शहर के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और लगातार अधिकारियों के साथ फील्ड में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नालों की सफाई का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो ठेकेदार काम में लापरवाही बरत रहे थे, उन्हें पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
मलकीत ढांडा ने फाइलों के रिकॉर्ड दिखाते हुए कहा कि विकास कार्यों में कोई धांधली नहीं होने दी जाएगी और वे हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कार्यों में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के प्रयास जारी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!