कटनी: छपरा पंचायत में 14 लाख का गबन, सरपंच और सचिव समेत चार पर वसूली का चाबुक
Katni Chhapra Panchayat financial irregularity recovery order. कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड की ग्राम पंचायत छपरा में करीब 14 लाख की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत दोषियों से कुल 13,96,522 रुपए की वसूली के आदेश दिए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत छपरा में वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) हरसिमरनप्रीत कौर ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ रिकवरी के आदेश जारी किए हैं। पंचायत में हुए करीब 14 लाख रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर शिकंजा कसा है।
निर्माण कार्यों और अवैध वसूली में गड़बड़ी
जनपद पंचायत बहोरीबंद द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पंचायत में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सरपंच और उनके पति द्वारा बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बैरियर लगाकर वाहनों से अवैध वसूली की गई। इसके अलावा, हाई स्कूल की बाउंड्री वॉल के निर्माण, नाली निर्माण और बाजार की नीलामी से प्राप्त होने वाली राशि का हिसाब-किताब भी संदिग्ध पाया गया, जिसमें भारी हेराफेरी की गई थी।
जांच में पाया गया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों की अनदेखी की गई और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ भी समझौता किया गया। इन वित्तीय अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को कुल 13,96,522 रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई अब संबंधित व्यक्तियों से की जाएगी।
किस पर कितना जुर्माना और वसूली
जिला पंचायत सीईओ ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत दोषियों की जिम्मेदारी तय की है। आदेश के अनुसार, सरपंच सुषमा गुप्ता से 4,63,374 रुपये, तत्कालीन सचिव गंगाराम हल्दकार से 3,66,374 रुपये और उपयंत्री सी.बी. चौबे से भी 3,66,374 रुपये की वसूली की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सरपंच पति नीरज कुमार गुप्ता को भी इस गबन का जिम्मेदार मानते हुए उन पर 2,00,400 रुपये की वसूली निर्धारित की गई है।
यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि पंचायत के कामकाज में किसी भी प्रकार की वित्तीय लापरवाही को प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा। विशेष रूप से सरपंच के पति द्वारा पंचायत के कार्यों में किए जा रहे हस्तक्षेप को लेकर भी प्रशासन ने कड़ी चेतावनी दी है।
15 दिन का अल्टीमेटम और भविष्य की कार्रवाई
प्रशासन ने सभी दोषियों को 15 दिनों का अंतिम समय दिया है। इस अवधि के भीतर उन्हें निर्धारित राशि पंचायत के खाते में जमा करानी होगी। यदि तय समय सीमा के भीतर यह राशि जमा नहीं की जाती है, तो प्रशासन और भी कठोर कदम उठाएगा। इसमें धारा 40 के तहत सरपंच को पद से हटाने की प्रक्रिया और धारा 92 के तहत जेल भेजने व संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शामिल है।
सीईओ ने बहोरीबंद जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे छपरा ग्राम पंचायत के कार्यों की निरंतर निगरानी करें। भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताएं न हों, इसके लिए पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अन्य पंचायतों के लिए भी एक चेतावनी है कि सरकारी धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और नियमों के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
