करनाल में बाढ़ सुरक्षा कार्यों में बड़ी लापरवाही: डेडलाइन खत्म होने के बाद शुरू हुआ काम
Karnal flood protection works delayed, irrigation department rushes stone laying post-deadline. तय समय सीमा 30 जून तक कार्य पूरे नहीं हो सके। अब डेडलाइन बीतने के बाद सिंचाई विभाग ने जल्दबाजी में स्टड बनाने और तटबंध मजबूत करने का काम शुरू किया है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के करनाल जिले में मानसून के दस्तक देते ही सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यमुना नदी के किनारे बाढ़ से बचाव के लिए निर्धारित किए गए सुरक्षा कार्य तय समय सीमा 30 जून तक पूरे नहीं हो सके। अब जब मानसून सक्रिय हो चुका है, विभाग आनन-फानन में अधूरे कार्यों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे इन सुरक्षा प्रबंधों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर संशय बना हुआ है।
25 करोड़ की योजना और समय पर काम का अभाव
यमुना नदी के तटीय इलाकों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने करीब 25 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नदी के किनारों पर नए स्टड का निर्माण करना और तटबंधों को मजबूत करने के लिए रिवेटमेंट का कार्य करना था। प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, इन सभी सुरक्षा कार्यों को 30 जून से पहले पूरा किया जाना अनिवार्य था ताकि मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थानीय आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।
हालांकि, निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी धरातल पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने पत्थर तो समय रहते नदी किनारे पहुंचा दिए थे, लेकिन स्टड बनाने और तटबंधों को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया में भारी देरी की गई। अब जब मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है, तब विभाग द्वारा जल्दबाजी में पत्थरों को नदी में डालने का काम किया जा रहा है।
गुणवत्ता से समझौता और सुरक्षा पर खतरा
बाढ़ बचाव कार्यों की तकनीकी प्रक्रिया के तहत पत्थरों को लोहे की तारबंदी (क्रेट्स) के साथ मजबूती से बांधकर स्टड तैयार किए जाने चाहिए थे। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि तेज बहाव में भी तटबंध सुरक्षित रहें। लेकिन वर्तमान में की जा रही जल्दबाजी में इन मानकों की अनदेखी की जा रही है। बिना उचित तारबंदी के केवल पत्थरों को नदी में डालने से उनकी पकड़ कमजोर रहने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अधूरे और बिना गुणवत्ता वाले कार्य बाढ़ के समय सुरक्षा कवच के बजाय खतरा बन सकते हैं। यदि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो ये अस्थाई रूप से डाले गए पत्थर पानी के दबाव को झेलने में असमर्थ हो सकते हैं, जिससे तटबंधों के टूटने का जोखिम बढ़ जाएगा।
हर साल बढ़ता है बाढ़ का संकट
करनाल के लिए यमुना नदी का जलस्तर बढ़ना एक वार्षिक चुनौती है। पहाड़ों में होने वाली भारी बारिश के बाद हथनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर तेजी से ऊपर आता है। हर साल इस स्थिति के चलते नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों को बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है। फसलें बर्बाद होती हैं और जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
इस बार भी प्रशासन ने बाढ़ से निपटने का दावा किया था, लेकिन कार्यों में हुई देरी ने इन दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है, क्योंकि उनकी सुरक्षा सीधे तौर पर इन तटबंधों की मजबूती पर निर्भर करती है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन मानसून के पीक सीजन से पहले इन कार्यों को किसी तरह सुरक्षित स्तर तक पहुंचा पाता है या फिर ग्रामीणों को एक बार फिर बाढ़ के खतरे के बीच रहने को मजबूर होना पड़ेगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
