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जोधपुर: प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने के मामले में बड़ी कार्रवाई, दो रेजिडेंट डॉक्टर सस्पेंड

जोधपुर के उम्मेद हॉस्पिटल में प्रसूता को गलत खून चढ़ाने मामले में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज मैनेजमेंट की ओर से कड़ा एक्शन लिया गया है। इस मामले में दो रेजिडेंट डॉक्टर्स को एकेडमिक सस्पेंड किया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

24 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 423
जोधपुर: प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने के मामले में बड़ी कार्रवाई, दो रेजिडेंट डॉक्टर सस्पेंड
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लापरवाही पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कड़ा रुख

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में एक प्रसूता को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाने का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार दो रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से एकेडमिक सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा, एक लैब टेक्नीशियन को उसके पद से हटा दिया गया है और एक नर्सिंगकर्मी को एपीओ (अवेलेबल फॉर पोस्टिंग ऑर्डर) किया गया है।

यह कार्रवाई अस्पताल द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय अनुशासन समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने पुष्टि की है कि जांच में चारों कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण पाई गई थी। उन्होंने बताया कि बिना किसी क्रॉस-चेकिंग प्रोटोकॉल का पालन किए मरीज को गलत ब्लड चढ़ाया गया, जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ गई।

क्या था पूरा मामला और कैसे बिगड़ी तबीयत

पीड़ित प्रसूता धापू का 11 जुलाई को बावड़ी में सामान्य प्रसव हुआ था। अत्यधिक रक्त की कमी के कारण उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उसे पहले दिन 'ओ पॉजिटिव' ब्लड चढ़ाया गया था। हालांकि, अगले दिन 12 जुलाई को जब उसे दोबारा रक्त की आवश्यकता पड़ी, तो चिकित्सा स्टाफ ने बड़ी चूक कर दी। उन्होंने बिना जांच किए 'ओ पॉजिटिव' की जगह 'बी पॉजिटिव' ब्लड चढ़ा दिया।

गलत खून चढ़ने के तुरंत बाद प्रसूता की स्थिति बिगड़ने लगी। उसे कंपकपी महसूस हुई और जल्द ही उसका यूरिन आना बंद हो गया, जो किडनी में गंभीर संक्रमण का संकेत था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे पहले महात्मा गांधी अस्पताल और बाद में एम्स (AIIMS) रेफर किया गया, जहाँ उसका उपचार अभी भी जारी है।

जांच समिति की रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया

घटना के बाद उम्मेद अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति में डॉ. रिजवाना शाहीन, डॉ. नीलम मीणा, डॉ. हरगोविंद मीणा, डॉ. सुरेंद्र सिंह राठौड़ और डॉ. गोविंद पटेल शामिल थे। समिति ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि की थी, लेकिन दोषियों के नाम स्पष्ट न होने के कारण अंतिम रिपोर्ट मांगी गई थी।

मंगलवार को सौंपी गई अंतिम रिपोर्ट में रेजिडेंट डॉक्टरों, लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की पहचान सुनिश्चित की गई। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि क्रॉस-चेकिंग प्रोटोकॉल का पालन किया जाता, तो इस बड़ी चिकित्सा चूक को टाला जा सकता था। फिलहाल, एम्स में भर्ती प्रसूता की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है।

अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सस्पेंड किए गए रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य स्टाफ पर विभागीय नियमानुसार आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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