औरंगाबाद: 10 प्रमुख सड़कों की बदहाली से हजारों ग्रामीण परेशान, जानलेवा गड्ढों से जूझ रहे लोग
औरंगाबाद जिले के अलग-अलग प्रखंडों में कई महत्वपूर्ण सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। इन सड़कों से रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन मरम्मत नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

औरंगाबाद में बदहाल सड़कों का जाल, आवागमन बना मुसीबत
बिहार के औरंगाबाद जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थित महत्वपूर्ण सड़कें लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। इन मार्गों पर रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है, लेकिन सड़कों की जर्जर स्थिति के कारण राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं, तो कहीं बारिश के बाद सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
अंबा-नबीनगर मार्ग पर फ्लाई ऐश और गड्ढों का कहर
अंबा से नबीनगर को जोड़ने वाली सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय है। इस मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जो वाहनों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। मेंह पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद एनटीपीसी से फ्लाई ऐश ले जाने वाले भारी वाहनों का दबाव इस सड़क पर बढ़ गया है। फ्लाई ऐश के कारण उड़ने वाली धूल से दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है। हालांकि विभाग ने गड्ढों को भरने के लिए कुछ प्रयास किए थे, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। यह सड़क बिहार और झारखंड के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिसकी मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है।
कुटुंबा प्रखंड में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। सिमर मोड़ से चंद्रपुरा, घेउरा से सरडीहा और कठरी से माली तक जाने वाली सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन रास्तों से स्कूल जाने वाले बच्चों और अस्पताल जाने वाले मरीजों को भारी परेशानी होती है। नबीनगर से गजना धाम तक जाने वाली 15 किलोमीटर की सड़क भी वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रही है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को एक घंटे का अतिरिक्त समय खर्च करना पड़ता है।
विकास के दावों के बीच ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
रफीगंज के कुंवर बिगहा गांव में करीब ढाई किलोमीटर सड़क का निर्माण न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बारिश के दौरान यहां एक से दो फीट तक पानी और कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे आसपास के कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट जाता है। इसी तरह गोह प्रखंड की मुड़वा-बाजितपुर-महदीपुर सड़क पर भी गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ओबरा में ऐतिहासिक बुद्ध स्थल तक जाने वाली सड़क की बदहाली के कारण स्कूल वाहन भी फंस रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
हसपुरा मुख्य बाजार से बांधी तक जाने वाली पुरानी थाना रोड की हालत पिछले 20 वर्षों से खराब है। इस सड़क पर तीन फीट तक गहरे गड्ढे हैं और नाली का गंदा पानी जमा रहता है। दाउदनगर क्षेत्र में भी एमआर योजना के तहत बनी सड़कें तीन साल के भीतर ही टूट गई हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता।
स्थायी समाधान की मांग पर अड़े ग्रामीण
जिले के विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें केवल खानापूर्ति वाली मरम्मत नहीं, बल्कि सड़कों का स्थायी निर्माण चाहिए। गड्ढों में मिट्टी या मेटल डालकर की जाने वाली अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बेहतर सड़कें होने से ही शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकेगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी जर्जर सड़कों का सर्वे कराया जाए और प्राथमिकता के आधार पर उनका पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया जाए। जब तक सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। प्रशासन की ओर से अब तक किसी ठोस कार्ययोजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में निराशा का माहौल है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!