झाबुआ का वह काला अध्याय: कॉन्वेंट मिशन सेंटर में ननों के साथ दरिंदगी और लूटपाट की खौफनाक रात
Madhya Pradesh Jhabua 1998 horror crime case. सितंबर1998 की एक रात रोते बच्चे के लिए दवा मांगने पहुंचे कुछ लोग और फिर कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर चीखों, दहशत और हिंसा से भर गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सितंबर 1998 की वह खौफनाक रात
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 28 साल पहले घटी एक घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी। आदिवासी अंचल में शिक्षा और स्वास्थ्य का अलख जगाने वाले एक कॉन्वेंट मिशन सेंटर में हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था और मानवता के प्रति गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
घटना 22 सितंबर 1998 की है। रात के करीब दो बजे थे और पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था। तभी कॉन्वेंट की डोरबेल बजी। अंदर मौजूद सिस्टर्स ने जब दरवाजा खोला, तो बाहर खड़े लोगों ने एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए मदद मांगी। लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, स्थिति पूरी तरह बदल गई।
हथियारबंद बदमाशों ने मचाया तांडव
दरवाजा खुलते ही 26 से अधिक हथियारबंद बदमाशों ने परिसर में धावा बोल दिया। उन्होंने न केवल पूरे कॉन्वेंट को अपने कब्जे में ले लिया, बल्कि विरोध करने पर वहां मौजूद लोगों के साथ मारपीट भी की। बदमाशों ने अलमारियां तोड़कर नकदी और कीमती सामान लूट लिया। करीब दो घंटे तक चले इस खौफनाक मंजर ने पूरे परिसर को दहशत में डाल दिया।
सुबह चार बजे के आसपास जब ग्रामीणों की नींद खुली और वे कॉन्वेंट की ओर बढ़े, तो वहां का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। मुख्य गेट टूटा हुआ था और अंदर अफरा-तफरी का माहौल था। उस समय कॉन्वेंट के प्रभारी फादर वहां मौजूद नहीं थे, जिसके चलते घटना की सूचना मिलने में देरी हुई।
लूट के पीछे छिपा था घिनौना सच
घटना के बाद जब फादर लौटे, तो वे स्थिति देखकर दंग रह गए। सुबह छह बजे पुलिस को लिखित शिकायत दी गई, जिसमें शुरू में केवल डकैती का उल्लेख था। लेकिन जब पुलिस ने चारों पीड़ित ननों के बयान दर्ज किए, तो मामला पूरी तरह पलट गया। ननों ने बताया कि लूटपाट के दौरान उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया।
पीड़ितों के बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत मेडिकल परीक्षण कराया और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। फॉरेंसिक जांच के लिए ननों के कपड़े और अन्य सबूतों को जब्त कर लिया गया। इस खुलासे के बाद पूरे झाबुआ में आक्रोश फैल गया और यह मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गया।
जांच और अनसुलझे सवाल
इस घटना ने मिशनरी संस्थानों की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े किए। पुलिस के सामने अब यह चुनौती थी कि इतने बड़े गिरोह को किसने संचालित किया और वारदात के बाद वे कहां गायब हो गए। लूट के इरादे से आए बदमाशों ने दुष्कर्म जैसी घिनौनी हरकत क्यों की, यह भी जांच का मुख्य बिंदु बना।
इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। झाबुआ के शांत आदिवासी इलाके में हुई इस हिंसा ने सामाजिक ताने-बाने को झकझोर दिया। पुलिस की जांच आगे बढ़ी और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की तलाश शुरू हुई, जिसने आने वाले समय में कई बड़े खुलासों की नींव रखी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
