इंदौर: पत्नी की हत्या कर रची कोबरा से मौत की झूठी कहानी, बैंक अफसर को उम्रकैद
Bank official husband convicted for wifes murder, faking cobra attack story. तकिये से घोंटकर की पत्नी की हत्या, कोबरा से रची मौत की झूठी कहानी; चर्चित शिवानी हत्याकांड में पति को उम्रकैद।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इंदौर के चर्चित शिवानी पटेरिया हत्याकांड में जिला अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बैंक में कार्यरत अमितेष ने अपनी पत्नी की हत्या को एक प्राकृतिक दुर्घटना का रूप देने के लिए बेहद खौफनाक साजिश रची थी। उसने राजस्थान के अलवर से एक कोबरा सांप मंगवाया और उसे पत्नी की मौत का कारण बनाने की कोशिश की।
साजिश का जाल: 620 किलोमीटर दूर से मंगाया कोबरा
घटना 1 दिसंबर 2019 की है, जब इंदौर के संचार नगर स्थित घर में शिवानी पटेरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। अमितेष ने दावा किया था कि शिवानी की मौत कोबरा के डसने से हुई है। जांच में सामने आया कि अमितेष ने 30 हजार रुपये में एक ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का कोबरा खरीदा था। उसने 11 दिनों तक इस सांप को घर में छिपाकर रखा और मौका मिलते ही तकिए से अपनी पत्नी का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने कोबरा को मारकर उसके दांत शिवानी के हाथ में गड़ा दिए ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
मृतका के परिजनों ने शुरू से ही हत्या का संदेह जताया था। शिवानी के पिता आनंद दीक्षित ने आरोप लगाया था कि अमितेष लंबे समय से दहेज के लिए प्रताड़ित कर रहा था और दिल्ली में किसी अन्य महिला के साथ संबंध होने के कारण वह शिवानी को रास्ते से हटाना चाहता था। परिजनों के अनुसार, घटना के दिन बच्चों को घर से दूर भेज दिया गया था और जब वे लौटे, तब तक शिवानी की मौत हो चुकी थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से आया। मेडिकल बोर्ड ने स्पष्ट किया कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी। फोरेंसिक जांच में बिस्तर की चादर अस्त-व्यस्त मिली और तकिए के कवर पर लार के निशान पाए गए, जो संघर्ष की पुष्टि करते थे। इसके अलावा, वैज्ञानिक साक्ष्यों ने साबित किया कि सांप के डसने के निशान कृत्रिम रूप से बनाए गए थे।
पुलिस की पूछताछ में अमितेष टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि आए दिन होने वाले विवादों से तंग आकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया था। कनाड़िया पुलिस ने इस मामले में अमितेष के साथ-साथ उसके पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन ऋचा चतुर्वेदी को भी आरोपी बनाया था।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत भी सजा
अदालत ने अमितेष को न केवल हत्या का दोषी माना, बल्कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का भी दोषी पाया। कोबरा को मारने और उसे आपराधिक साजिश में इस्तेमाल करने के लिए उसे तीन साल की सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। साक्ष्य मिटाने के जुर्म में उसे दो साल की अतिरिक्त सजा मिली है।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कॉल रिकॉर्डिंग, वॉइस सैंपल और फोरेंसिक रिपोर्ट पेश की, जिसे अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। करीब साढ़े छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, 24 जून 2026 को आए इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया कि सुनियोजित तरीके से रची गई यह साजिश कानून की नजरों से नहीं बच सकी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
