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IIT BHU और भारतीय नौसेना में हुआ बड़ा समझौता, स्वदेशी रक्षा तकनीक पर मिलकर करेंगे काम

और भारतीय नौसेना के बीच स्वदेशी रक्षा एवं नौसैनिक प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में 30 जुलाई को हुए इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत दोनों संस्थान अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
IIT BHU और भारतीय नौसेना में हुआ बड़ा समझौता, स्वदेशी रक्षा तकनीक पर मिलकर करेंगे काम
मूल स्रोत

वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT BHU) और भारतीय नौसेना ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। नई दिल्ली में नौसेना मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी मुख्य रूप से स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार को गति देने के उद्देश्य से की गई है।

अत्याधुनिक तकनीकों पर होगा संयुक्त शोध

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इसमें उन्नत हथियार प्रणालियों, सेंसर तकनीक, अंडरवाटर ऑब्जेक्ट डिटेक्शन और आधुनिक रडार प्रणाली का विकास शामिल है। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भी संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। समुद्री इंजीनियरिंग और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी तकनीकी समाधान खोजने पर जोर दिया जाएगा।

तकनीकी विकास के साथ-साथ यह साझेदारी शैक्षणिक सहयोग को भी नई दिशा देगी। इसके माध्यम से संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की दूरी को कम करने के लिए संयुक्त कार्यशालाएं, सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे रक्षा परियोजनाओं में अकादमिक विशेषज्ञता का लाभ मिल सके।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार ने इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर भविष्य की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित किए जाएंगे। यह पहल रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को और अधिक मजबूत करेगी।

आईआईटी बीएचयू के प्रतिनिधियों ने भी इस सहयोग को संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि संस्थान की बहुविषयक अनुसंधान क्षमता नौसेना की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है। वहीं, प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव ने उल्लेख किया कि इस समझौते से संस्थान के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय महत्व की रक्षा परियोजनाओं में सीधे योगदान देने का अवसर प्राप्त होगा।

तीन साल तक प्रभावी रहेगा समझौता

यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। इस दौरान दोनों संस्थान विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं पर काम करेंगे। तीन वर्षों की इस अवधि में प्राप्त परिणामों के आधार पर भविष्य में इस सहयोग के दायरे को और अधिक बढ़ाने की योजना पर भी विचार किया जाएगा। यह साझेदारी न केवल नौसेना की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि देश के युवाओं को रक्षा अनुसंधान में करियर बनाने के लिए प्रेरित भी करेगी।

इस समझौते के माध्यम से भारतीय नौसेना को अत्याधुनिक तकनीकी समाधान मिलेंगे, जबकि आईआईटी बीएचयू के छात्रों और शोधकर्ताओं को वास्तविक रक्षा चुनौतियों पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। यह तालमेल रक्षा नवाचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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