हरदा में मूंग किसानों का हल्ला बोल: शत-प्रतिशत खरीदी और केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग पर अड़े अन्नदाता
Harda summer moong 100% purchase demand. हरदा जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की शत प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर किसानों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। भारतीय किसान संघ ने जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरदा मंडी में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की सरकारी खरीद को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ गया है। शनिवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले जिले के सैकड़ों किसानों ने कृषि उपज मंडी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों की मुख्य मांग है कि सरकार मूंग की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करे और खरीदी की सीमा में तत्काल वृद्धि करे।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ग्राम चारखेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से 200 से अधिक किसान बाइक रैली निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार बी.डी. तमखाने को सौंपा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार की वर्तमान खरीद नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी नाराजगी जाहिर की।
120 किलो प्रति एकड़ की सीमा पर सवाल
किसानों का सबसे बड़ा विरोध सरकार द्वारा तय की गई 120 किलोग्राम प्रति एकड़ की खरीद सीमा को लेकर है। किसानों का तर्क है कि जिले में मूंग की औसत पैदावार 15 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो रही है। ऐसे में 120 किलो की सीमा बहुत कम है, जिससे उनकी मेहनत, सिंचाई, खाद और बीज की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
भारतीय किसान संघ के जिला प्रवक्ता राजनारायण गोर ने कहा कि सरकार एक तरफ 'कृषि कल्याण वर्ष' मनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीदी सीमा कम होने के कारण किसानों को अपनी बची हुई उपज खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
बीमा राशि और केंद्रों की कमी का मुद्दा
धरना स्थल पर किसानों ने केवल मूंग खरीदी ही नहीं, बल्कि वर्ष 2025 की सोयाबीन फसल की बीमा राशि के लंबित वितरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बीमा राशि का भुगतान जल्द से जल्द किसानों के खातों में किया जाए। इसके अलावा, किसानों ने खरीदी केंद्रों की सीमित संख्या पर भी चिंता जताई है।
किसानों का कहना है कि कम केंद्र होने के कारण उन्हें अपनी उपज लेकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ जाता है। इसके साथ ही तौल में देरी और स्लॉट व टोकन की अव्यवस्था के कारण उन्हें मंडी में कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने और अधिक केंद्र खोलने की मांग की है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि शत-प्रतिशत मूंग खरीदी शुरू नहीं हुई, तो वे भोपाल जाकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों ने अपनी मांगों के प्रति सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि उनकी अनदेखी की गई, तो आगामी चुनावों में इसके परिणाम सरकार को भुगतने होंगे।
फिलहाल, किसान धरना स्थल पर ही डटे हुए हैं और उन्होंने वहीं भोजन बनाने और रात बिताने का निर्णय लिया है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण किसानों में भारी रोष व्याप्त है और वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ानटिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!