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भोपाल: बड़ा तालाब के एफटीएल दायरे में बने अवैध फार्म हाउस और बंगलों पर चला प्रशासन का बुलडोजर

Bhopal Big Pond encroachment removal action begins. Follow latest updates on farmhouse & bungalow demolition near FTL zone on Dainik Bhaskar. भोपाल के बड़ा तालाब किनारे अतिक्रमण और कब्जों को हटाने के लिए शनिवार से फिर बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई। फार्म हाउस और बंगले हटाए जा रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 0
भोपाल: बड़ा तालाब के एफटीएल दायरे में बने अवैध फार्म हाउस और बंगलों पर चला प्रशासन का बुलडोजर
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बड़ा तालाब किनारे अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई

भोपाल के लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपना लिया है। शनिवार को प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमों ने तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) के दायरे में किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई के तहत तालाब के किनारे बने अवैध फार्म हाउस और आलीशान बंगलों को चिन्हित कर उन्हें जमींदोज किया जा रहा है।

नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता के नेतृत्व में टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत की मौजूदगी में यह कार्रवाई गौरागांव और बिशनखेड़ी क्षेत्र में की गई। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को कुल छह बड़े अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य रखा गया था। ये सभी निर्माण बिना किसी वैध अनुमति या बिल्डिंग परमिशन के तालाब के प्रतिबंधित क्षेत्र में किए गए थे।

एनजीटी के निर्देशों के बाद तेज हुई मुहिम

यह कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में नगर निगम द्वारा पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) के बाद शुरू हुई है। निगम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि तालाब क्षेत्र में कुल 21 अवैध निर्माणों को हटाया जाना है। इनमें से तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के हैं, जबकि 18 निर्माण 2022 के बाद किए गए हैं। सर्वे के दौरान सेवनिया गौंड, गौरा विशनखेड़ी और प्रेमपुरा जैसे इलाकों में बड़े रिसॉर्ट और फार्म हाउस भी चिन्हित किए गए हैं।

प्रशासन ने पहले ही इन अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर सूचित कर दिया था कि भोज वेटलैंड के एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में आने वाले किसी भी निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में चले सीमांकन अभियान के दौरान 347 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से अब तक केवल 51 छोटे अतिक्रमण ही हटाए जा सके हैं, जिससे अभी भी करीब 296 अवैध कब्जे हटना बाकी हैं।

भू-माफिया का खेल और मुनारों का विवाद

बड़ा तालाब के किनारे सक्रिय भू-माफियाओं द्वारा किए गए फर्जीवाड़े का खुलासा भी इस कार्रवाई के दौरान हुआ है। मौके पर एफटीएल सीमा दर्शाने वाली पांच अलग-अलग तरह की मुनारें (सीमा चिह्न) पाई गई हैं, जिनमें से अधिकांश फर्जी हैं। इन मुनारों के साथ छेड़छाड़ कर लोगों को कम दाम पर जमीन बेचने का लालच दिया गया था। आधिकारिक मुनारों के अलावा अन्य सभी चिह्न अवैध हैं, जिनके आसपास ही सबसे ज्यादा अतिक्रमण पनपे हैं।

तालाब के संरक्षण के लिए पिछले एक दशक में कई सर्वे हुए हैं, जिनमें 2016 का डीजीपीएस सर्वे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ हालिया सर्वे शामिल है। हालांकि, इन सर्वे रिपोर्टों के फाइलों में दब जाने के कारण धरातल पर सीमांकन की स्थिति हमेशा अस्पष्ट बनी रही। 2016 के सर्वे में तालाब का क्षेत्रफल 38.72 वर्ग किमी आंका गया था, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से अतिक्रमणकारियों को लाभ मिलता रहा।

भविष्य की राह और मास्टर प्लान की मांग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीब आठ महीने पहले तालाब के आसपास के अतिक्रमणों का नए सिरे से सर्वे करने के निर्देश दिए थे। वहीं, स्थानीय सांसद आलोक शर्मा ने बड़ा तालाब के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान बनाने की वकालत की है, ताकि इसे भविष्य में सुरक्षित रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बुलडोजर चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि तालाब की सीमा का स्पष्ट सीमांकन और मास्टर प्लान का क्रियान्वयन अनिवार्य है।

बड़ा तालाब एक रामसर साइट है, जो न केवल भोपाल की प्यास बुझाता है, बल्कि दुर्लभ पक्षियों का बसेरा भी है। पिछले वर्षों में भदभदा बस्ती से 386 घरों को हटाने के बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि अब यह अभियान सिलसिलेवार तरीके से हुजूर, बैरागढ़ और टीटी नगर के सभी चिन्हित क्षेत्रों में जारी रहेगा।

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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