ग्वालियर: 12 साल के बच्चे की हत्या के दो दोषियों को उम्रकैद, प्रेम प्रसंग के बदले में रची थी साजिश
Gwalior minor murder case update. Two accused sentenced to life imprisonment. ग्वालियर सेशन कोर्ट के उन्नीसवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार की अदालत ने सोमवार (6 जुलाई 2026) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 12 वर्षीय मासूम बालक हेमसिंह राजपूत की निर्मम और रूह कँपा देने वाली हत्या के दो आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

प्रेम प्रसंग की रंजिश में मासूम की बलि
ग्वालियर की एक अदालत ने 12 वर्षीय बालक हेमसिंह राजपूत की निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार की अदालत ने सोमवार को मुख्य आरोपी शिवम उर्फ तोता कुशवाह और उसके सहयोगी अमन गोस्वामी को अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया। अदालत ने इस अपराध को अत्यंत क्रूर और मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला माना है।
घटनाक्रम के अनुसार, मुख्य आरोपी शिवम का मृतक बालक की बड़ी बहन नंदनी के साथ प्रेम संबंध था। हालांकि, लड़की के परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और नंदनी का विवाह कहीं और तय कर दिया। अपनी प्रेमिका की शादी किसी और से होने से बौखलाए शिवम ने परिवार से बदला लेने की ठानी और नंदनी के छोटे भाई हेम को अपना निशाना बनाया।
मेला दिखाने के बहाने ले गए मौत के मुंह में
29 जुलाई 2024 को हेम अपनी मां के साथ मेला देखने के लिए निकला था। इसी दौरान आरोपी शिवम ने उसे फोन कर बहला-फुसलाकर अपने पास बुला लिया। आरोपी उसे अपने साथी अमन के साथ तिघरा थाना क्षेत्र के देव खो रोड स्थित सुनसान जंगल में ले गए। वहां आरोपियों ने पहले शराब का सेवन किया और फिर पत्थर से वार कर बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी। पहचान छिपाने के लिए उन्होंने शव को पत्थरों के नीचे दबा दिया था।
अगले दिन एक चरवाहे को जंगल में शव के अवशेष दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और डिजिटल साक्ष्यों के जाल से आरोपियों तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की।
डिजिटल साक्ष्यों से खुला अंधे कत्ल का राज
पुलिस और साइबर सेल की टीम ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस मामले को सुलझाया। जांच के दौरान शराब की दुकानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें आरोपी बच्चे को बाइक पर ले जाते हुए दिखाई दिए। इसके अलावा, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने भी आरोपियों की मौजूदगी घटनास्थल पर साबित कर दी। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर ही अदालत ने महज 19 महीने के भीतर अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि प्रेम प्रसंग या पारिवारिक असहमति का बदला किसी निर्दोष बच्चे की जान लेकर लेना अक्षम्य अपराध है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति कानून का रुख सख्त होना अनिवार्य है ताकि समाज में न्याय का संदेश बना रहे।
दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले से मृतक के परिजनों को न्याय मिला है, हालांकि एक मासूम की जान जाने का गम परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बना हुआ है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मजबूत पैरवी के कारण ही इस मामले में दोषियों को जल्द सजा मिल सकी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
